रायपुर, 02 सितंबर।
बारिश की हर बूंद को सहेजकर भू-जल स्तर बढ़ाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य के पांच जिलों ने भी देश के शीर्ष 10 जिलों में जगह बनाई है।
नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल और जनभागीदारी से किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रदेश में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं और संरचनाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से इसे व्यापक जनअभियान बनाया गया है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में करीब चार प्रतिशत हिस्सेदारी रखने के बावजूद छत्तीसगढ़ ने अभियान में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है।
सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का भी उल्लेख किया। इस पहल के तहत किसान स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए उपलब्ध करा रहे हैं। अभियान में जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित निगरानी और प्रगति की समीक्षा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
अभियान के पहले दो चरणों में देश में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ ने तीसरे चरण में पहला स्थान हासिल किया। इस चरण में प्रदेश में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 77 हजार 719 का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
राज्य के सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जिले जल संरक्षण के मामले में देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं। प्रदेश में इन प्रयासों का असर भी दिखाई दे रहा है और पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। साथ ही पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान जताया गया है।















