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संपादकीय
02 Sep, 2026

ब्लैकबोर्ड से कोड तक सरकारी स्कूलों में दस्तक दे रहा भविष्य, क्या सरकारी स्कूल का नौवीं का छात्र रोबोट से बात कर पाएगा

मध्य प्रदेश के सरकारी हाईस्कूलों में नौवीं कक्षा से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पाठ्यक्रम शुरू होने जा रहा है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को भी आधुनिक तकनीकी शिक्षा का लाभ मिल सकेगा।

भोपाल, 2 सितंबर।

एक दौर था, जब सरकारी स्कूल का नाम आते ही मन में एक ही तस्वीर उभरती थी - टूटी-फूटी इमारत, अधूरी किताबें और रोजगार से दूर सैद्धांतिक पढ़ाई। लेकिन अब वही सरकारी स्कूल एक नई करवट ले रहा है। अब वहां किताब के साथ कंप्यूटर का कीबोर्ड भी बजेगा और ब्लैकबोर्ड के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की स्क्रीन भी चमकेगी। मध्य प्रदेश के 1848 सरकारी हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में नौवीं कक्षा से एआई असिस्टेंट का व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू होने जा रहा है और इसकी शुरुआत एक सितंबर से ऑनलाइन कक्षाओं के रूप में होगी। यह सोच का बदलाव है। इसे केवल एक शैक्षिक आदेश की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। यह उस पुरानी मानसिकता पर चोट है, जो कहती थी कि तकनीक और भविष्य की पढ़ाई सिर्फ निजी स्कूलों के बच्चों का हक है। अब प्रदेश का वह बच्चा, जो गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ता है, वह भी सीखेगा कि एआई क्या है, मशीन कैसे सोचती है और वर्चुअल असिस्टेंट कैसे बनाया जाता है। अब शिक्षा को किताब से निकालकर जीवन और रोजगार से जोड़ा जा रहा है।

इस योजना के तहत जिन स्कूलों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी यानी आईसीटी लैब पहले से मौजूद हैं, वहीं यह पाठ्यक्रम लागू होगा। स्कूल शिक्षा विभाग के विमर्श पोर्टल और यूट्यूब चैनल पर इस विषय से जुड़े वीडियो अपलोड किए जाएंगे। सप्ताह में तीन दिन नए पाठ का प्रसारण होगा और शुक्रवार को अभ्यास एवं प्रयोगात्मक कार्य कराए जाएंगे। शनिवार को पुनरावृत्ति दिवस होगा, ताकि कठिन विषयों को दोबारा समझा जा सके। यदि किसी दिन तकनीकी कारणों से वीडियो नहीं चल पाया तो अगले कार्य दिवस में उसे दिखाना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था से यह तय होगा कि कोई भी छात्र किसी पाठ से वंचित न रहे।

प्राचार्य और शिक्षक की जिम्मेदारी केवल हाजिरी तक सीमित नहीं। इस बार जिम्मेदारी केवल विभाग की नहीं, बल्कि स्कूल के प्राचार्य और कंप्यूटर प्रशिक्षक की भी तय की गई है। उन्हें यह देखना होगा कि बच्चा केवल स्क्रीन देख ही नहीं रहा, बल्कि समझ भी रहा है। उसकी जिज्ञासा को शांत करना, उसकी शंकाओं का समाधान करना और उसे प्रयोग करने के लिए प्रेरित करना ही इस कार्यक्रम की असली सफलता होगी। रोजगार कौशल, अंग्रेजी और विज्ञान के शिक्षक भी इसमें सहायक भूमिका निभाएंगे, ताकि एआई की पढ़ाई एकांगी न लगे, बल्कि अन्य विषयों से भी जुड़ती हुई लगे।

इस योजना के लिए शुरू में अधिक स्कूलों की पहचान की गई थी, लेकिन बाद में सूची का परिशोधन किया गया। 24 प्रयोगशालाओं को अन्य स्कूलों में स्थानांतरित किया गया। 48 विद्यालय, जो पहले से ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध थे, उन्हें इस सूची से हटा दिया गया। 42 ऐसे विद्यालय, जो मध्य प्रदेश ओपन स्कूल के माध्यम से पहले ही एआई का पाठ्यक्रम चला रहे थे, उन्हें भी इस नई सूची में शामिल नहीं किया गया। 15 विद्यालयों में लैब उपलब्ध नहीं होने या पहले से अन्य व्यावसायिक ट्रेड संचालित होने के कारण उन्हें बाहर रखा गया। यह परिशोधन दर्शाता है कि सरकार केवल संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता पर भी ध्यान दे रही है।

गांव के प्रतिभाशाली बच्चों के लिए सबसे बड़ा अवसर इस आलेख का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि इसका लाभ किसे मिलेगा। इसका सबसे बड़ा लाभ उन बच्चों को मिलेगा, जिनके पास संसाधन कम हैं, लेकिन सपने बड़े हैं। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चे अक्सर तकनीक से दूर रह जाते हैं। उनके पास न तो महंगे कोचिंग संस्थान होते हैं, न ही निजी लैपटॉप। लेकिन जब उनके अपने स्कूल की स्मार्ट क्लास में एआई का वीडियो चलेगा तो उनकी दुनिया भी बदल जाएगी। वे घर बैठे विमर्श पोर्टल पर वीडियो दोबारा देख सकेंगे और खुद से अभ्यास कर सकेंगे। यह डिजिटल खाई को पाटने की दिशा में एक ठोस कदम है।

रोजगार की नई राह खुलेगी। यह पाठ्यक्रम केवल ज्ञान के लिए नहीं, बल्कि रोजगार के लिए भी है। आज पूरी दुनिया में एआई विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है। बड़ी-बड़ी कंपनियां ऐसे युवाओं को खोज रही हैं, जो एआई टूल्स बनाना जानते हों, जो डेटा को समझते हों। नौवीं कक्षा से ही जब बच्चा इस दिशा में सोचना शुरू करेगा तो बारहवीं तक आते-आते वह इस क्षेत्र में इतना सक्षम हो जाएगा कि वह खुद का स्टार्टअप भी शुरू कर सकेगा। यह व्यावसायिक शिक्षा को सही अर्थों में सार्थक बनाएगा।

सरकारी शिक्षा की छवि बदलने का समय है। लंबे समय से यह धारणा बनी हुई है कि सरकारी स्कूल में पढ़ाई का स्तर कम होता है, लेकिन इस तरह के नवाचार से यह छवि टूटेगी। जब गांव का बच्चा अंग्रेजी में एआई असिस्टेंट से सवाल पूछेगा और रोबोटिक्स की बात करेगा तो समाज का नजरिया अपने आप बदलेगा। अभिभावकों का भरोसा सरकारी तंत्र पर लौटेगा और नामांकन दर में भी बढ़ोतरी होगी। यह केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी आंदोलन है।

इस सुंदर तस्वीर के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। कई स्कूलों में इंटरनेट की गति बहुत धीमी है, बिजली की आंख-मिचौली आम है और कंप्यूटर प्रशिक्षकों की भारी कमी है। कई जगह एक प्रशिक्षक को दो-तीन स्कूल संभालने पड़ते हैं। ऐसे में हर दिन वीडियो दिखाना और अभ्यास कराना आसान काम नहीं है। इसके लिए सरकार को बुनियादी ढांचे पर और अधिक निवेश करना होगा, प्रशिक्षकों की नियमित नियुक्ति करनी होगी और लैब को अपडेट रखना होगा। तभी यह योजना कागज से निकलकर जमीन पर सफल हो पाएगी।

भविष्य की तैयारी आज से ही। कुल मिलाकर यह योजना केवल 1848 स्कूलों की योजना नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के शैक्षिक भविष्य की दिशा तय करने वाली योजना है। एक सितंबर से शुरू होने वाली ये कक्षाएं केवल ऑनलाइन वीडियो नहीं हैं, बल्कि मध्य प्रदेश के लाखों बच्चों के लिए भविष्य के दरवाजे खोलने वाली चाबी हैं। यदि इसे ईमानदारी और संसाधनों के साथ लागू किया गया तो वह दिन दूर नहीं, जब सरकारी स्कूल का छात्र भी कहेगा कि हां, मैंने अपना एआई असिस्टेंट खुद बनाया है।

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आज का राशिफल

व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। शुभांक-4-6-8

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