Naidunia Live
• टॉप न्यूज़ • मध्य प्रदेश • विज्ञान व प्रौद्योगिकी • अपराध • शिक्षा • संपादकीय • धर्म / अध्यात्म • वीडियो स्टोरी • मौसम • त्योहार • प्रेरक कहानियाँ
• वीडियो • न्यूज़ आर्काइव
संपादकीय
02 Sep, 2026

मक्का एग्रीमेंट से इस्लामिक नाटो की आहट: बांग्लादेश की एंट्री से भारत की पूर्वी सीमा पर नया संकट

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते में बांग्लादेश के जुड़ने की अटकलों ने भारत के लिए भू-राजनीतिक और सामरिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

भोपाल, 2 सितंबर।

सऊदी, पाकिस्तान और तुर्किये का रक्षा समझौता क्या भारत के लिए 1971 के बाद सबसे बड़ी सामरिक चुनौती है? दुनिया में सुरक्षा गठबंधनों की नई परिभाषा लिखी जा रही है। 18 दिन पहले सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच पवित्र शहर मक्का में एक ऐसा रक्षा समझौता हुआ है, जिसने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में हलचल मचा दी है। यह समझौता नाटो के अनुच्छेद-5 की तरह है, जिसमें करार है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। अब इस गठबंधन में कुछ और इस्लामिक देशों के शामिल होने की अटकलें तेज हैं और इनमें सबसे बड़ा नाम है भारत का पड़ोसी बांग्लादेश।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार हुमायूं कबीर के हालिया बयान ने इस चर्चा को और हवा दी है। उनके अनुसार, ढाका इस मक्का समझौते को लेकर गंभीर है और सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के साथ आगे बढ़ने के विकल्प पर विचार कर रहा है। कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन बांग्लादेश के दो मंत्रियों के बयानों से यह संकेत स्पष्ट है कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार इस्लामिक सैन्य गठबंधन की ओर देख रही है।

मक्का समझौता है क्या और यह इतना खतरनाक क्यों है? इस समझौते को रणनीतिक हलकों में इस्लामिक नाटो कहा जा रहा है। इसके तीन मुख्य स्तंभ हैं। पहला, सामूहिक सुरक्षा - किसी एक सदस्य देश पर बाहरी आक्रमण की स्थिति में सभी सदस्य सैन्य सहायता देंगे। दूसरा, रक्षा उत्पादन और प्रौद्योगिकी साझा करना - तुर्किये ड्रोन तकनीक में आगे है, पाकिस्तान मिसाइल और परमाणु तकनीक में और सऊदी अरब के पास पैसा है। तीसरा, खुफिया जानकारी साझा करना और संयुक्त सैन्य अभ्यास।

भारत के लिए यह खतरनाक इसलिए है, क्योंकि इसके दो सदस्य पाकिस्तान और तुर्किये भारत के खिलाफ खुला रुख रखते हैं। पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर और तुर्किये ने कई बार संयुक्त राष्ट्र में भारत के खिलाफ बयान दिए हैं। सऊदी अरब अभी तक भारत का सामरिक साझेदार रहा है, लेकिन इस नए गठबंधन में उसका जाना भारत की पश्चिम एशिया नीति के लिए झटका है।

बांग्लादेश क्यों शामिल होना चाहता है? हुमायूं कबीर के बयान के मायने क्या हैं? बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार हुमायूं कबीर के अनुसार, मक्का समझौते में शामिल होने से बांग्लादेश को तीन फायदे दिख रहे हैं। सुरक्षा की गारंटी - शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की सेना में अस्थिरता है और अंतरिम सरकार को लगता है कि एक बड़े सैन्य गठबंधन से उसकी सत्ता को बाहरी वैधता मिलेगी।

आर्थिक मदद - सऊदी अरब बांग्लादेशी मजदूरों का सबसे बड़ा बाजार है और सऊदी फंड से बांग्लादेश को अरबों डॉलर की मदद मिल सकती है। पाकिस्तान और तुर्किये सस्ते हथियार और ड्रोन देने को तैयार हैं। वैचारिक बदलाव - हसीना सरकार के दौरान बांग्लादेश की विदेश नीति भारत-केंद्रित थी। अब यूनुस सरकार इस्लामिक पहचान को आगे करके भारत से दूरी बनाना चाहती है। हुमायूं कबीर का बयान इसी नए इस्लामिक झुकाव का प्रतीक है।

लेकिन ढाका यह भूल रहा है कि इस गठबंधन में शामिल होना उसके लिए आत्मघाती हो सकता है। 1971 में पाकिस्तान ने बांग्लादेशियों पर जो जुल्म किए, उसे बांग्लादेश अभी भूला नहीं है। अब उसी पाकिस्तान के साथ सैन्य गठबंधन करना मुक्ति संग्राम के शहीदों का अपमान होगा।

अगर बांग्लादेश इस इस्लामिक नाटो में शामिल होता है तो भारत के लिए यह तीन मोर्चों की चुनौती बन जाएगी - पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में चीन और अब पूर्व में बांग्लादेश-पाकिस्तान-तुर्किये का गठबंधन। सामरिक रूप से सबसे बड़ा खतरा सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक पर है। बांग्लादेश की सीमा से यह कॉरिडोर सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा है। अगर बांग्लादेश की जमीन से तुर्किये के ड्रोन और पाकिस्तानी सलाहकार भारत की निगरानी करने लगे तो पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। खतरा समुद्री है। सऊदी और तुर्किये की नौसेना बंगाल की खाड़ी में मौजूदगी बढ़ा सकती है, जो भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद महासागर में दबदबे को चुनौती देगी।

सबसे बड़ा खतरा वैचारिक है। मक्का समझौता सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि इस्लामिक दुनिया को एक ध्रुव में लाने की कोशिश है। इससे भारत के अंदर भी कट्टरपंथी तत्वों को बढ़ावा मिल सकता है। भारत के पास इस चुनौती से निपटने के लिए चार स्तर पर काम करना होगा। कूटनीतिक - सऊदी अरब को इस गठबंधन से अलग करने की कोशिश। भारत सऊदी का सबसे बड़ा तेल खरीदार है और लाखों भारतीय वहां काम करते हैं। रियाद को समझाना होगा कि पाकिस्तान के साथ गठबंधन उसकी भारत के साथ 100 अरब डॉलर के व्यापार को नुकसान पहुंचाएगा।

बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली - भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बांग्लादेश में जल्द चुनाव कराने का दबाव बनाना होगा। एक चुनी हुई सरकार ही इस तरह के खतरनाक समझौते को रोक सकती है।

सैन्य तैयारी - पूर्वी कमान को मजबूत करना, बांग्लादेश सीमा पर ड्रोन रोधी प्रणाली लगाना और म्यांमार के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में निगरानी बढ़ाना। आर्थिक दबाव - बांग्लादेश भारत पर बिजली, प्याज, अनाज और चिकित्सा सुविधाओं के लिए निर्भर है। भारत को यह स्पष्ट करना होगा कि इस्लामिक नाटो में जाना आर्थिक रूप से महंगा पड़ेगा।

1971 की विरासत बनाम मक्का का नया जाल। मक्का समझौता अभी कागज पर है, लेकिन इसकी परछाई लंबी है। बांग्लादेश के सलाहकार हुमायूं कबीर का बयान बताता है कि ढाका में कुछ ताकतें भारत से बने-बनाए रिश्ते को तोड़कर इस्लामाबाद और अंकारा की ओर देख रही हैं। यह बांग्लादेश की जनता की भावना के खिलाफ है। बांग्लादेश का जन्म पाकिस्तान के खिलाफ लड़े गए युद्ध से हुआ था, किसी इस्लामिक सैन्य गठबंधन से नहीं। भारत को इस स्थिति को भावुकता से नहीं, बल्कि चाणक्य नीति से संभालना होगा। यह समय बांग्लादेश को दुश्मन घोषित करने का नहीं, बल्कि उसे समझाने का है कि उसकी सुरक्षा भारत के साथ है, पाकिस्तान के साथ नहीं। अगर 1971 में इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांटा था तो आज मोदी सरकार को कूटनीति से इस नए इस्लामिक नाटो को बांग्लादेश की सीमा से पहले ही रोकना होगा।

|
वीडियो फीचर

शिवपुरी में शराब दुकान बंद कराने पहुंचीं महिलाओं का पुलिस से विवाद, लाठियां चलीं


पांढुरना में गोटमार परंपरा के नाम पर बरसे पत्थर, 700 पुलिसकर्मी तैनात

जहरीली शराब कांड का आरोपी रवि लखेरा एनकाउंटर में घायल, पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार

सागर जहरीली शराब कांड पर CM मोहन यादव का बड़ा बयान | दोषियों को ऐसा सबक सिखाएंगे!

भोपाल में जूनियर डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने का आंदोलन, सड़क जाम से भारी ट्रैफिक

शिक्षक दिवस पर CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा, TET अभ्यर्थी दे सकेंगे ऑफलाइन परीक्षा

आज का राशिफल

व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। शुभांक-4-6-8

आज का मौसम

भोपाल

22° / 31°

Partly sunny

ट्रेंडिंग न्यूज़