जम्मू, 02 सितंबर।
राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर टोल संग्रह में कथित गड़बड़ी और धन शोधन से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को देश के कई हिस्सों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इसी कार्रवाई के तहत जम्मू में कारोबारी राकेश चौधरी के आवास और कार्यालय की जांच की गई।
केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ पहुंची जांच टीम ने गांधी नगर के ग्रीन बेल्ट क्षेत्र स्थित आवास पर तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान परिसर को सील कर वहां आने-जाने पर रोक लगा दी गई। अधिकारियों ने त्रिकुटा नगर स्थित कार्यालय में भी दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों की जांच की।
तलाशी के दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, संबंधित कागजात और संभावित डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला गया। जांच एजेंसी विभिन्न टोल प्लाजा पर कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़े पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।
जांच का प्रमुख बिंदु कथित रूप से फर्जी अथवा अनधिकृत टोल रसीदें तैयार करने के लिए अवैध सॉफ्टवेयर के उपयोग से जुड़ा है। अधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि इस व्यवस्था के जरिए टोल के रूप में प्राप्त राशि का संचालन किस प्रकार किया जाता था।
एजेंसी इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कथित रूप से एकत्र धन को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के आधिकारिक खातों से बाहर रखा गया था या नहीं और बाद में उसका उपयोग अथवा हस्तांतरण किन माध्यमों से किया गया।
कथित वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला को समझने के लिए जांच अधिकारी धन के प्रवाह की कड़ियों की भी पड़ताल कर रहे हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित राशि किन व्यक्तियों या संस्थाओं तक पहुंची और इस कथित मामले में किसकी क्या भूमिका रही।
धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से यह कार्रवाई की जा रही है। जम्मू के साथ उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और कोलकाता में भी विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलने की जानकारी सामने आई है।
जांच दल दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल कर रहा है। इसका उद्देश्य कथित टोल संग्रह धोखाधड़ी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क और लेन-देन की पूरी तस्वीर स्पष्ट करना है।
तलाशी के दौरान जब्त सामग्री अथवा दस्तावेजों की विस्तृत जानकारी अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है। एजेंसी बरामद रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद आगे की कार्रवाई कर सकती है।
जांच एजेंसी कथित मामले में शामिल कुल राशि का पता लगाने के साथ अन्य लोगों और संस्थाओं की भूमिका भी खंगाल रही है। जांच पूरी होने के बाद मामले में अन्य नाम सामने आने और आगे कानूनी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।














