अयोध्या, 02 सितंबर।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। बुधवार को हुई ट्रस्ट की बैठक के बाद नई जिम्मेदारियों और तीन नए सदस्यों के नामों की घोषणा की गई। गोविंद देव गिरि को महासचिव बनाया गया है।
गोविंद देव गिरि इससे पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष का दायित्व संभाल रहे थे। अब उनके स्थान पर दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रस्ट में तीन नए सदस्य भी शामिल किए गए हैं, जिनमें एक महिला सदस्य भी हैं।
पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया था। उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी मिश्रा वायुसेना में 39 वर्ष की सेवा के बाद 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए थे।
ट्रस्ट के नए सदस्यों में अयोध्या छावनी निवासी अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और शिकोहाबाद निवासी डॉ. निर्मला यादव शामिल हैं। डॉ. निर्मला यादव श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य होंगी।
74 वर्षीय मदन मोहन पांडेय राम जन्मभूमि स्वामित्व विवाद में रामलला की ओर से कानूनी पैरवी करने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में इस मामले से जुड़े पक्ष की दलीलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वह उत्तर प्रदेश में छह वर्ष तक अतिरिक्त महाधिवक्ता भी रह चुके हैं।
महेश भागचंदका वर्ष 2020 में राम मंदिर भूमि पूजन और 22 जनवरी 2024 को हुए प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में यजमान रहे थे। वह वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम की कार्यकारिणी के सदस्य हैं और राम वनगमन यात्रा से जुड़े 292 पवित्र तीर्थस्थलों में श्रीराम स्तंभ स्थापना के कार्य से भी जुड़े रहे हैं।
शिकोहाबाद निवासी 66 वर्षीय डॉ. निर्मला यादव हिंदी और संस्कृत में परास्नातक हैं तथा 19 वर्षों तक महाविद्यालय की प्राचार्य रह चुकी हैं। ट्रस्ट में उनके शामिल होने के साथ पहली बार किसी महिला को सदस्य बनाया गया है।
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद दो जुलाई को तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सेवानिवृत्त भारतीय विदेश सेवा अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया था। ट्रस्ट ने पिछले दो माह में उनके कार्य को लेकर सराहना और आभार व्यक्त किया।
बैठक में चढ़ावे की नकद राशि की गणना में मानवीय हस्तक्षेप कम करने के लिए तकनीकी व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा हुई। इस संबंध में दो बैंकों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनका मूल्यांकन किया जा रहा है।
ट्रस्ट ने चयन समिति के सदस्यों के प्रति भी आभार जताया। समिति ने साढ़े पांच हजार आवेदनों की जांच और सैकड़ों अभ्यर्थियों के साक्षात्कार के बाद चयन प्रक्रिया पूरी की।
ट्रस्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में उसकी कुल आय 237 करोड़ रुपये और व्यय 91 करोड़ रुपये रहा। निर्माण समेत अन्य कार्यों पर 425 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया गया। 31 मार्च 2026 तक ट्रस्ट के पास कुल 1882 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध थी।















