नई दिल्ली, 2 सितंबर।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजधानी में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत अब तक हुई प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की है।
इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य देश के चिन्हित सौ जिलों में इस योजना के अमल को गति देना और किसानों के लिए प्रदर्शन में सुधार लाना था।
यह योजना कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधता लाने, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और कटाई के बाद भंडारण क्षमता मजबूत करने पर जोर देती है।
मंत्रालय के अनुसार छह प्रमुख मापदंडों पर इन जिलों का औसत स्कोर अप्रैल दो हजार छब्बीस के बाइस दशमलव पांच चार से बढ़कर जुलाई में अड़तीस दशमलव आठ पांच हो गया है।
यह महत्वाकांक्षी योजना ग्यारह मंत्रालयों की छत्तीस केंद्रीय योजनाओं और राज्य की योजनाओं के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी के जरिए चलाई जा रही है।
वार्षिक लक्ष्यों के मुकाबले प्रगति पर नजर रखने के लिए इन सभी योजनाओं के तहत कुल एक सौ इक्कीस संकेतकों की पहचान की गई है।
समीक्षा बैठक के दौरान वास्तविक लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने और केवल कागजी खर्च से आगे बढ़कर ठोस परिणाम हासिल करने पर विशेष जोर दिया गया।
इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पिछले साल मंजूरी मिलने के बाद ग्यारह अक्टूबर दो हजार पच्चीस को देश भर में लॉन्च किया गया था।
इसके अलावा मंत्री महोदय ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वाटरशेड विकास घटक की प्रगति की भी बारीकी से समीक्षा की।
बैठक में राज्यों को यह निर्देश दिए गए कि वे जमीनी स्तर पर परियोजनाओं को तेजी से पूरा करें ताकि स्पष्ट और मापने योग्य नतीजे सामने आ सकें।
उन्होंने सूखा मुक्त भारत के संकल्प को पूरा करने में वाटरशेड विकास को एक बेहद अहम जरिया बताया है।
मंत्री का कहना था कि इस कार्यक्रम का असली मकसद केवल जल स्रोत तैयार करना नहीं बल्कि खेतों तक पानी पहुंचाकर किसानों की आय बढ़ाना है।















