कभी एक ही जिले में अलग-अलग समय में कलेक्टरी करने वाले साहब इन दिनों भोपाल में सरकारी बंगलों में आसपास ही रहते हैं। जिले में कलेक्टर रहते चली आ रही प्रतिस्पर्धा अभी भी जारी है। यदि एक साहब के बंगले में पांच लाख का रिनोवेशन हुआ है तो तत्काल दूसरे साहब भी एड़ी-चोटी का जोर लगाकर अपने बंगले में भी काम कराते हैं। दोनों साहबों की पुरानी प्रतिस्पर्धा से लोक निर्माण विभाग के अधिकारी परेशान हैं।















