हैदराबाद, 02 सितंबर।
तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट गांव में स्थित प्राचीन गोल्लाला गुड़ी मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित कर दिया है। यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल काकतीय रुद्रेश्वर, यानी रामप्पा मंदिर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित है।
माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण काकतीय शासनकाल के दौरान 12वीं और 13वीं शताब्दी के बीच कराया गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस संबंध में 31 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र के असाधारण अंक में अधिसूचना प्रकाशित की गई।
गोल्लाला गुड़ी तीन गर्भगृहों वाला त्रिकूटालय मंदिर है। इसके पूर्व दिशा की ओर स्थित मंडप तीनों गर्भगृहों से जुड़ा हुआ है। मंदिर की मुंडेर पर सुंदर मूर्तिकला दिखाई देती है, वहीं स्तंभों के ऊपरी हिस्सों और द्वारों पर तराशे गए हंसों की कतारें तथा जालीदार शिल्प इसकी विशेष पहचान हैं।
मंदिर के सामने दो स्वतंत्र तीर्थस्थल भी बने हुए हैं, जिन्हें आकर्षक नक्काशी से सजाया गया है। इन संरचनाओं पर द्वारपालों की आकृतियां बनी हैं। इनके सामने अंतराल कक्ष हैं, जिनमें बारीक छज्जों और जालियों का सुंदर काम किया गया है।
मुख्य मंदिर के अग्रभाग में प्रवेश मंडप है, जो केंद्रीय सभागृह तक पहुंचाता है। इसके उत्तर, दक्षिण और पश्चिम दिशा में अंतरालों के साथ तीन गर्भगृह निर्मित हैं। मंदिर की दीवारों में बने देव-कोष्ठों में भगवान विष्णु, लक्ष्मी, गणेश और महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
प्राचीन मंदिर की पूरी संरचना पशु आकृतियों और पुष्पीय डिजाइनों से सुसज्जित ऊंची जगती पर निर्मित है। अपनी विशिष्ट स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व के कारण गोल्लाला गुड़ी मंदिर अब राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों की श्रेणी में शामिल हो गया है।















