राजधानी में बहुत से बड़े-बड़े अफसर हैं, लेकिन कुछ अधिकारी अपने कार्य-व्यवहार, स्वभाव और आचरण के कारण अपना अलग स्थान बनाने में सफल रहते हैं। पिछले दिनों एक संस्थान में शीर्ष मुखिया द्वारा एक दिव्यांग कर्मचारी से सीढ़ी पर बैठकर चर्चा करना और उसकी समस्या का समाधान करना मानवीय सरोकार एवं आम आदमी के लिए अच्छा संदेश है।















