भोपाल, 02 सितंबर।
मध्य प्रदेश में अपराधों की जांच को अधिक आधुनिक, वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित बनाने के उद्देश्य से अपराध अनुसंधान विभाग, पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विशेष न्यायालयिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन बुधवार को तकनीकी और वैज्ञानिक विषयों पर कई सत्र आयोजित किए गए।
कार्यशाला विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव के निर्देशन तथा पुलिस उप महानिरीक्षक साकेत पांडे, प्रशांत खरे और सहायक पुलिस महानिरीक्षक मनीष खत्री के मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है। दूसरे दिन क्षेत्रीय एवं राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारियों ने प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों पर तकनीकी जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला भोपाल की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. पूनम सिंह ने न्यायालयिक भौतिकी, ध्वनि और भौतिक साक्ष्यों के प्रबंधन पर जानकारी दी। उन्होंने ध्वनि नमूनों और अन्य भौतिक अवशेषों के वैज्ञानिक तरीके से संकलन, संरक्षण तथा प्रयोगशाला तक भेजने की प्रक्रिया समझाई।
वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. राजीव दुआ ने न्यायालयिक रसायन एवं विष विज्ञान के अंतर्गत रासायनिक नमूनों, मादक पदार्थों और विषैले पदार्थों के संकलन व सुरक्षित रखरखाव के संबंध में प्रशिक्षण दिया। उन्होंने विवेचना में रासायनिक साक्ष्यों की शुद्धता बनाए रखने को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
जैविक साक्ष्यों के प्रबंधन पर डॉ. कमलेश कैथोलिया ने रक्त, वीर्य, बाल, लार और अन्य शारीरिक द्रव्यों के वैज्ञानिक संकलन, पैकेजिंग, अभिरक्षा श्रृंखला तथा डीएनए प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया से अवगत कराया।
अपराध स्थल प्रबंधन के सत्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रीति गायकवाड ने अपराध स्थल जांच किट के उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। उन्होंने घटनास्थल पर साक्ष्यों की पहचान, प्राथमिकता के आधार पर उनकी सुरक्षित जब्ती, उचित प्रलेखन और स्थल को दूषित होने से बचाने के तरीके बताए।
अंतिम सत्र में राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला सागर के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी रामदा कनेश ने बैलिस्टिक्स साक्ष्य प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया। इसमें आग्नेयास्त्रों, प्रयुक्त कारतूसों, गोलियों और गनशॉट अवशेषों के संकलन, संरक्षण तथा प्रयोगशाला परीक्षण की प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों की व्यावहारिक जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
कार्यशाला का समापन 03 सितंबर को विशेष पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव की उपस्थिति में होगा। अंतिम दिन अपराध स्थल फोटोग्राफी, डिजिटल साक्ष्यों की प्रस्तुति और उनके न्यायालयीन प्रमाणीकरण पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।















