काठमांडू, 2 सितंबर।
नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ से हुई तबाही के बाद पीड़ितों की पहचान के लिए भारत से पहुंचे विशेष फोरेंसिक विशेषज्ञों ने काम शुरू कर दिया है।
भारतीय दूतावास ने जानकारी दी कि उन्नीस सदस्यीय भारतीय दल ने काठमांडू घाटी के पुलिस प्रयोगशालाओं में स्थानीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों का विश्लेषण आरंभ कर दिया है।
इस संयुक्त प्रयास का मुख्य उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से जुटाए गए नमूनों की जांच में तेजी लाना और लापता लोगों की शिनाख्त करना है।
नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक एक हजार से ज्यादा शव बरामद किए जा चुके हैं जिनमें से कई के अवशेष ही मिलने के कारण पहचान बेहद जटिल हो गई है।
मृतकों की बढ़ती संख्या और भारी तबाही के बीच प्रशासन ने भविष्य में पहचान सुनिश्चित करने के लिए कई लावारिस शवों के डीएनए सैंपल सुरक्षित रख लिए हैं।
चितवन जिले में सबसे अधिक शव बरामद किए गए हैं जहां नमूनों को सुरक्षित रखने के बाद प्रशासन ने नदियों के किनारे खुले स्थानों में कई शवों का अंतिम संस्कार किया है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अभी भी हजारों लोग लापता हैं जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं जिससे मरने वालों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है।
रासुवा और नुवाकोट जिलों के विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं के आसपास लापता लोगों की तलाश के लिए राहत और खोज अभियान लगातार जारी रखे गए हैं।















