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सरकार व नीतियाँ
02 Sep, 2026

सड़क हादसों में मौत रोकना सभी की जिम्मेदारी, नौ जिलों पर विशेष फोकस

न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने इंदौर में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में विभागों के समन्वय से दुर्घटनाओं में होने वाली हर मौत रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

इंदौर, 02 सितंबर।

सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करना केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी संबंधित विभागों और समाज का साझा दायित्व है। उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने कहा कि मध्य प्रदेश में हाल के समय में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में कमी आई है। यह संतोषजनक स्थिति है, लेकिन दुर्घटनाओं और मौतों को और कम करने के लिए निरंतर तथा प्रभावी प्रयास जरूरी हैं।

बुधवार को इंदौर के सिटी बस कार्यालय में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिले की सड़क सुरक्षा व्यवस्था और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में सड़क हादसों से होने वाली जनहानि को नियंत्रित करने के उपायों पर अधिकारियों ने जानकारी प्रस्तुत की।

अधिकारियों ने दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान और उनमें सुधार, सड़क सुरक्षा के प्रति जनजागरूकता, यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई तथा यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयासों की जानकारी दी। सड़क निर्माण और अभियांत्रिकी से जुड़े सुधारात्मक कार्यों के साथ दुर्घटनाओं में मृत्यु की संख्या कम करने के लिए अपनाए जा रहे विभिन्न उपायों पर भी चर्चा हुई।

न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में आवश्यक सुधार के साथ आम नागरिकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना जरूरी है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर ठोस और परिणाम देने वाली कार्रवाई करने पर जोर दिया।

उन्होंने बताया कि देश में पिछले पांच वर्षों के सड़क दुर्घटना आंकड़ों के आधार पर अधिक मौतों वाले जिलों की पहचान कर उन्हें ‘शून्य मृत्यु जिला’ के रूप में विकसित करने की पहल की गई है। मध्य प्रदेश में पहले धार, खरगोन, रीवा, सतना, सागर और जबलपुर को इस पहल में शामिल किया गया था। अब इंदौर, भोपाल और उज्जैन को जोड़ने के बाद प्रदेश के कुल नौ जिलों को शून्य मृत्यु जिला बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।

न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल किसी जिले को एक नाम देना नहीं है। वास्तविक लक्ष्य ऐसी सड़क सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें सड़क दुर्घटनाओं में किसी भी व्यक्ति की जान न जाए। इसके लिए पुलिस, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सभी संबंधित संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि इंदौर प्रदेश का प्रमुख और तेजी से विकसित होने वाला शहर है, इसलिए यहां सड़क सुरक्षा पर विशेष ध्यान आवश्यक है। उज्जैन धार्मिक और पर्यटन महत्व का केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। राजधानी होने के कारण भोपाल को भी इस अभियान में शामिल करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अब तक की कमियों को पीछे छोड़ते हुए भविष्य के लिए सकारात्मक सोच के साथ काम करना होगा।

न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा कि सड़क हादसे में होने वाली हर मौत को रोकना सड़क सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए। सुरक्षित सड़क व्यवस्था के लिए केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है।

पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार

न्यायमूर्ति सप्रे ने उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को सड़क पर सुरक्षित रूप से पैदल चलने का मौलिक अधिकार है। किसी सड़क पर पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ या सुरक्षित मार्ग उपलब्ध नहीं होने और इसके कारण दुर्घटना होने पर संबंधित सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और सड़क निर्माण से जुड़ी अन्य एजेंसियों को सड़क की योजना और डिजाइन तैयार करते समय पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। पर्याप्त और सुरक्षित फुटपाथ की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। फुटपाथ होने के बाद उसका उपयोग नहीं करने की स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन जहां फुटपाथ ही नहीं बनाया गया है, वहां पैदल चलने वाले के पास सड़क पर चलने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं रहता।

सड़क किनारे बैठे, खड़े या घूमने वाले लोगों और मार्गों पर मौजूद विभिन्न अवरोधों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर भी उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल वाहन चलाने वालों तक सीमित विषय नहीं है। सड़क का उचित डिजाइन, पैदल मार्ग, अतिक्रमण हटाना, यातायात प्रबंधन और रास्तों में मौजूद बाधाओं को दूर करना भी सरकारी विभागों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

न्यायमूर्ति सप्रे ने अधिकारियों से सभी विभागों के संयुक्त प्रयासों से ऐसी सड़क सुरक्षा प्रणाली विकसित करने का आह्वान किया, जिसमें वाहन चालकों के साथ पैदल यात्रियों और सड़क का उपयोग करने वाले अन्य सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बैठक में नगर निगम, यातायात पुलिस, स्मार्ट सिटी, जिला प्रशासन और सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। शुभांक-4-6-8

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