अहमदाबाद, 03 सितंबर।
गुजराती फिल्म जगत और सुगम संगीत को बुलंदी पर पहुंचाने वाले नामचीन संगीतकार गौरांग व्यास का बुधवार देर रात निधन हो गया। अहमदाबाद में 87 वर्ष की आयु उन्होंने अंतिम सांस ली, जिससे पूरी कला दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है।
महान संगीतकार अविनाश व्यास के सुपुत्र गौरांग ने बचपन से ही सुरों की दुनिया में कदम रख दिया था। महज पांच साल की उम्र में हारमोनियम पर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था।
इंजीनियरिंग की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर उन्होंने अपना पूरा जीवन संगीत साधना को समर्पित कर दिया। पिता के साथ काम सीखने के बाद उन्होंने 'लाखो फूलाणी' फिल्म से स्वतंत्र सफर शुरू किया था।
अपने लंबे कला सफर में उन्होंने एक सौ से अधिक गुजराती फिल्मों को यादगार धुनें दीं। 'भवनी भवई' और 'लीलुडी धरती' जैसी फिल्मों में उनके संगीत ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।
लता मंगेशकर और किशोर कुमार जैसे देश के दिग्गजों ने उनकी धुनों को स्वर दिया। 'दीकरी तो पारकी थापण' और 'मणियारा' जैसे गीतों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।
फिल्मी दुनिया के अलावा उन्होंने सुगम संगीत और गरबों में भी अनगिनत प्रयोग किए। उनके रचे लोकप्रिय गरबे और भजन आज भी लोगों की जुबान पर पूरी तरह रमे हुए हैं।
संगीत जगत में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें राज्य स्तर पर ग्यारह पुरस्कार मिले थे। वर्ष 2022 में सरकार ने उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा था।
गुजराती संस्कृति को समृद्ध करने वाले इस फनकार के जाने से संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है। उनकी बनाई मधुर धुनें हमेशा श्रोताओं के दिलों में जीवंत रहेंगी।















