नई दिल्ली, 03 सितंबर।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से आयोजित जल प्रबंधन कार्यशाला में 14 राज्यों के प्रतिनिधियों ने जल संरक्षण और बेहतर प्रबंधन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं और पानी के प्रभावी उपयोग के उपायों पर चर्चा की गई।
भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य जल से संबंधित विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना और राज्यों में जल प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करना है।
उन्होंने बताया कि इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से सभी राज्यों के जलशक्ति मंत्रियों का सम्मेलन आयोजित किया गया था। सम्मेलन के समापन के बाद भाजपा की इस कार्यशाला की शुरुआत हुई। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कार्यशाला का उद्घाटन किया, जिसके बाद विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गए।
कार्यशाला में 14 राज्यों के 25 जलशक्ति मंत्रियों ने भाग लिया। इनमें सिंचाई, ग्रामीण पेयजल, पेयजल एवं स्वच्छता तथा जन स्वास्थ्य इंजीनियरिंग जैसे जल से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभालने वाले मंत्री शामिल रहे।
पहले सत्र में मंत्रालयों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद विशेषज्ञों ने भारत के जल संसाधनों की वर्तमान स्थिति और उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर जानकारी साझा की।
कार्यशाला में संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने को लेकर भी एक सत्र आयोजित किया गया। अन्य बैठकों में जल प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य राज्यों के जल विभागों के कामकाज में सुधार, अनुभवों के आदान-प्रदान और प्रभावी जल प्रबंधन रणनीति तैयार करने में सहयोग करना है। कार्यशाला पूरी होने के बाद मंत्री अपने-अपने राज्यों में यहां प्राप्त अनुभवों को शासन व्यवस्था में लागू करेंगे।















