न्यूयॉर्क, 03 सितंबर।
अमेरिकी धरती से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक निवेशकों को संबोधित करते हुए देश की आर्थिक प्रगति का जोरदार खाका खींचा। उन्होंने बताया कि तमाम वैश्विक उथल-पुथल और मुश्किल हालातों को पीछे छोड़ते हुए भारत ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच 7.8 प्रतिशत की धमाकेदार जीडीपी वृद्धि दर हासिल की है। इसी मजबूत रफ्तार के दम पर देश दुनिया भर के फलक पर सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली विशाल अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूती से डटा हुआ है।
बैंक ऑफ़ अमेरिका और भारत के महावाणिज्य दूतावास के साझा तत्वावधान में न्यूयॉर्क में आयोजित एक उच्चस्तरीय व्यावसायिक गोलमेज सम्मेलन के दौरान यह बात सामने आई। कार्यक्रम के आरंभ में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि बीते 31 अगस्त को सामने आए जीडीपी के ये ताजे आंकड़े भारतीय बाजार की आंतरिक शक्ति की गवाही देते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते प्रगाढ़ होने से इस तेज रफ्तार का दोहरा लाभ उठाया जा सकता है। इससे पहले पेन स्टेशन पहुंचने पर राजदूत क्वात्रा और कार्यवाहक महावाणिज्य दूत विशाल हर्ष ने वित्त मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया था।
निवेशकों के बीच अपनी बात रखते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मार्गदर्शन में देश ने सुधारों की ऐसी रफ्तार पकड़ी है जिसने विनियामक निश्चितता को पुख्ता किया है। इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड जैसे बड़े बदलावों के चलते अब नियम कायदों का पालन करना बहुत सहज हो गया है और दफ्तरों का कागजी बोझ काफी हद तक कम हुआ है। एक दशक से अधिक समय से सरकार की नीतियों के केंद्र में यही पारदर्शिता और सुगमता रही है ताकि हर निवेशक को बिना किसी अड़चन के आगे बढ़ने का मौका मिल सके।

सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे के विकास, विमानन क्षेत्र को मजबूती, पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन और निवेश अनुकूल माहौल तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटरों के विस्तार, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, एमएसएमई इकाइयों को सुगमता से कर्ज मुहैया कराने और बैंकों के फंसे हुए कर्ज यानी एनपीए को घटाने के मोर्चे पर ठोस परिणाम सामने आए हैं। इन तमाम कदमों ने उद्योग जगत और बैंकिंग सेक्टर को भीतर से बेहद ताकतवर और गतिशील बना दिया है।
महामारी के बाद के इस दौर में वैश्विक स्तर पर लगातार बाधाएं आने के बावजूद देश ने वित्तीय अनुशासन और समझदारी के मार्ग से कभी समझौता नहीं किया। आज हालात यह हैं कि देश के विभिन्न राज्यों के बीच अधिक से अधिक निवेश खींचने की एक स्वस्थ और आक्रामक प्रतिस्पर्धा छिड़ चुकी है। वित्त मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में दोहराया कि ये तमाम प्रयास साल 2047 तक देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने के उस महाभियान का अटूट हिस्सा हैं जिसके लिए पूरी सरकारी मशीनरी संकल्पबद्ध होकर जुटी हुई है।















