नई दिल्ली, 03 सितंबर।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साझा सुभाषितम् के माध्यम से उचित संरक्षण और अनुकूल परिवेश के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि सही आश्रय मिलने पर सामान्य गुण भी असाधारण श्रेष्ठता और प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकता है।
प्रधानमंत्री ने सामाजिक मंच पर संस्कृत का एक श्लोक साझा करते हुए व्यक्ति और वस्तु के विकास में उसके परिवेश की महत्वपूर्ण भूमिका को समझाया।
उन्होंने श्लोक के भावार्थ में बताया कि किसी व्यक्ति या वस्तु की सार्थकता तथा उन्नति इस बात पर निर्भर करती है कि उसे किस प्रकार का पात्र और वातावरण मिलता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इसे साधारण जल और सीप के उदाहरण से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सामान्य जल सीप के संपर्क में आकर अमूल्य मोती का रूप ले सकता है, उसी प्रकार उचित और योग्य संरक्षण मिलने पर साधारण गुण भी सर्वोच्च श्रेष्ठता और सम्मान तक पहुंच सकता है।















