कीव, 03 सितंबर।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात कर रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के संभावित उपायों पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में शांति स्थापना, मौजूदा युद्ध की स्थिति और उससे जुड़े महत्वपूर्ण मानवीय व वैश्विक मुद्दों पर विचार किया गया।
मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की को यूक्रेन के विदेश मंत्री के साथ हुई अपनी बातचीत की जानकारी दी। विदेश मंत्री के साथ चर्चा में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के विषय शामिल रहे, वहीं राष्ट्रपति के साथ वार्ता का मुख्य केंद्र मौजूदा संघर्ष को समाप्त करने के उपाय रहे।
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने भी इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए युद्ध समाप्त करने के भारत के संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय युद्ध का नहीं, बल्कि शांति स्थापित करने का है। भारत का रुख स्पष्ट है और उम्मीद है कि विश्व की अन्य प्रमुख शक्तियां भी युद्ध समाप्त करने तथा विश्वसनीय शांति स्थापित करने के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाएंगी।
वार्ता के दौरान काला सागर की स्थिति पर भी चर्चा हुई। नागरिक जहाजों के सामने उत्पन्न खतरों और समुद्री मार्गों पर निर्भर क्षेत्रों तक खाद्य सामग्री की आपूर्ति बनाए रखने के मुद्दे पर विचार किया गया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए।
हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान युद्ध समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि लगातार चल रहे संघर्ष की जगह अब युद्ध के अंत का समय आना चाहिए, क्योंकि इसका प्रत्येक दिन और अधिक जान-माल की क्षति तथा तबाही लेकर आता है।
ज़ेलेंस्की ने अपने संदेश में दावा किया कि जयशंकर के कीव प्रवास के दौरान रूस ने एक बार फिर जेट से संचालित ‘शाहिद’ ड्रोन छोड़े। उनके अनुसार, यूक्रेन की लड़ाकू विमान सेवा की कार्रवाई के कारण भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा। उन्होंने दावा किया कि रूस का उद्देश्य बंदरगाहों, खाद्य आपूर्ति गलियारों और आवश्यक आपूर्ति को प्रभावित करना है।
इससे पहले विदेश मंत्री ने यूक्रेन के अपने समकक्ष एंड्री सिबिहा से मुलाकात की थी। जयशंकर ने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करना और वर्ष 2022 से जारी युद्ध के व्यापक संदर्भ पर विचार करना है।
प्रधानमंत्री मोदी की शांति और युद्ध समाप्त करने की अपील को दोहराते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि उनकी यात्रा बातचीत और कूटनीति की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही। यूक्रेनी पक्ष की ओर से साझा किए गए विचारों और दृष्टिकोण को वह आगे लेकर जाएंगे।
उन्होंने भारत की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि समाधान दोनों पक्षों को ही तलाशना होगा, लेकिन भारत किसी भी रूप में सहायता कर सकता है तो वह इसके लिए तैयार है।
जयशंकर ने बताया कि दो दिन पहले कीव में हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की भी जान गई थी। उन्होंने सभी मृतकों के प्रति शोक और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इसी कारण आज की बातचीत बेहद खुलकर और स्पष्ट रूप से हुई।
उन्होंने कहा कि संघर्ष के कुछ विशेष पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिनमें वाणिज्यिक जहाजों पर होने वाले हमले प्रमुख रहे। विभिन्न देशों के ध्वज वाले जहाजों पर भारतीय नाविक कार्य करते हैं और वे भी इन घटनाओं से प्रभावित हुए हैं।
समुद्री परिवहन पर पड़ रहे प्रभाव से विकासशील देशों के अनेक देश प्रभावित हो रहे हैं। इसके कारण ईंधन, उर्वरक और खाद्य सामग्री की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है। विदेश मंत्री ने कहा कि इन सभी विषयों और उनसे जुड़े व्यापक प्रभावों पर दोनों पक्षों ने अपने विचार साझा किए।















