भोपाल, 03 सितंबर।
मध्य प्रदेश में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई दो अभिनव पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाएंगी। प्रदेश की सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में उत्कृष्ट और अन्य राज्यों में लागू किए जा सकने वाले मॉडल के रूप में मान्यता मिली है। इन दोनों पहलों को सुमन रोडमैप 2030 में भी शामिल किया गया है।
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने गुरुवार को इसे मध्य प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को सुरक्षित, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दे रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ सामुदायिक भागीदारी, डिजिटल तकनीक और आंकड़ों के आधार पर निगरानी को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट जैसी पहलें गर्भवती महिलाओं तथा उनके परिवारों तक आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाने में उपयोगी साबित हो रही हैं। इनके माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने, जागरूकता बढ़ाने और समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने में सहायता मिल रही है।
लखनऊ में 2 और 3 सितंबर को आयोजित सुमन रोडमैप 2030 राष्ट्रीय कार्यशाला में मध्य प्रदेश के इन मॉडलों को विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला में समुदाय के साथ बेहतर जुड़ाव, मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को आसान बनाने और महिलाओं को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचाने में इन पहलों की उपयोगिता को सराहा गया। इनके प्रभावी स्वरूप को देखते हुए अन्य राज्यों में भी इन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुसार अपनाया जाएगा।
मध्य प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की प्रबंध संचालक डॉ. सलोनी सिडाना, वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. अर्चना मिश्रा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी सुमन रोडमैप 2030 की दिशा-निर्देश पुस्तिका में भी प्रदेश की दोनों पहलों को स्थान दिया गया है।
सुमन पंचायत का उद्देश्य पंचायत स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ाते हुए सुरक्षित मातृत्व और नवजात स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करना है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं, उनके परिवारों और स्थानीय समुदाय को जरूरी स्वास्थ्य जानकारी देकर सेवाओं से जोड़ा जाता है। समय पर जांच, संस्थागत प्रसव, प्रसव पूर्व एवं प्रसव पश्चात देखभाल तथा नवजात की उचित देखरेख के प्रति भी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।
इस पहल की खास बात यह है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित न रखकर पंचायतों और समुदाय की साझा जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाया गया है। सुमन पंचायत योजना के तहत कोई ग्राम पंचायत लगातार एक वर्ष तक अपने क्षेत्र में मातृ और शिशु मृत्यु दर शून्य बनाए रखती है तो उसे सरकार की ओर से एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
वहीं, सुमन सखी चैटबॉट डिजिटल माध्यम से महिलाओं और परिवारों तक गर्भावस्था, प्रसव, नवजात की देखभाल तथा उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी पहुंचाने की पहल है। इसका उद्देश्य सही समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराकर महिलाओं एवं उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर उपयोग करने में सक्षम बनाना है। यह पहल स्वास्थ्य तंत्र और समुदाय के बीच जानकारी के अंतर को कम करने में भी सहायक है।
राष्ट्रीय कार्यशाला में अनमोल 2.0 डैशबोर्ड का भी प्रदर्शन किया गया। इसे उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान, निगरानी और लगातार संपर्क के लिए विकसित किया गया है। डैशबोर्ड के माध्यम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी एक जगह उपलब्ध होती है, जिससे मैदानी और पर्यवेक्षण स्तर के अधिकारियों को महिलाओं की पहचान कर समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में सुविधा मिलती है।
अनमोल 2.0 में संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और नियमित निगरानी से प्रसव के दौरान संभावित खतरों को कम करने तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें समय रहते उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में मदद मिलती है।















