नई दिल्ली, 03 सितंबर।
हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हिमनदीय झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ तथा हिमस्खलन के खतरों से निपटने की तैयारियों को लेकर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने गुरुवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में पर्वतीय क्षेत्रों में संभावित आपदाओं से बचाव के लिए तैयारियों, निगरानी व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। हाल ही में नेपाल में हिमनदीय झील फटने से आई बाढ़ में बड़े स्तर पर जनहानि होने की घटना का भी उल्लेख किया गया।
गृह सचिव ने कहा कि हिमनदीय झीलों के फटने और हिमस्खलन जैसी आपदाओं से निपटने की रणनीति केवल घटना के बाद की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने जोखिम के आधार पर योजना बनाने, पहले से बचाव के उपाय करने और समुदायों को आपदा के लिए तैयार रखने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने राज्यों को वर्ष 2024 में केंद्र सरकार से स्वीकृत हिमनदीय झील आपदा शमन परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।
समीक्षा बैठक में संवेदनशील हिमनदीय झीलों और बर्फ से ढके इलाकों की लगातार निगरानी पर जोर दिया गया। इसके साथ ही अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान, चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने और अंतिम छोर तक समय पर सूचना पहुंचाने की व्यवस्था पर चर्चा हुई।
राज्य एजेंसियों, जिला प्रशासन तथा वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाने को भी आवश्यक बताया गया। जल प्रवाह के संभावित मार्गों की पहचान, निकासी योजनाओं की तैयारी और संवेदनशील स्थानों पर जरूरी संसाधनों की पहले से तैनाती जैसे उपायों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
बैठक के अंत में विभिन्न एजेंसियों के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखने और नियमित रूप से सूचनाओं के आदान-प्रदान के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों में आपदाओं के कारण होने वाली जनहानि और संपत्ति के नुकसान को कम करना है।
बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।















