नई दिल्ली, 03 सितंबर।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जल संरक्षण से जुड़ी तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने और दुनिया के सफल प्रयोगों से सीख लेकर प्रभावी समाधान विकसित करने पर जोर दिया है। उन्होंने शहरीकरण, बढ़ती आबादी और भविष्य की जल आवश्यकताओं से उत्पन्न चुनौतियों के प्रति शहरी स्थानीय निकायों को जागरूक करने की आवश्यकता बताई।
प्रधानमंत्री ने जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय जल सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए शहरी स्थानीय निकायों के लिए भी ऐसे चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने जल बचाने वाली तकनीकों के अधिक उपयोग की बात कही। साथ ही भारतीय निर्माताओं और संबंधित पक्षों को बेहतर समाधान विकसित करने में मदद के लिए प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और वैश्विक सफल प्रयोगों से परिचित कराने का सुझाव दिया।
प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में हुई दो दिनों की गहन चर्चा की सराहना करते हुए कहा कि इससे निकले समयबद्ध और क्रियान्वित किए जा सकने वाले बिंदुओं पर लगातार समीक्षा और सीखने की प्रक्रिया के माध्यम से काम होना चाहिए। उन्होंने इसे केवल एक बार का आयोजन बनाकर सीमित नहीं रखने पर जोर दिया।
जनभागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों में जल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘जल उत्सव’ को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया। उन्होंने जलाशयों से गाद निकालने की प्रक्रिया को नियमित कार्यक्रम बनाने और इसके लिए स्पष्ट मानदंड तथा मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने की बात भी कही।
बांधों की सुरक्षा पर प्रधानमंत्री ने हर मानसून से पहले पूरी तैयारी, निर्धारित सावधानियों के पालन और विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने जल प्रबंधन और जल शासन से संबंधित ज्ञान तथा क्षमता को विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई।
प्रधानमंत्री ने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के लिए राज्यों के बीच अध्ययन यात्राओं की व्यवस्था का सुझाव दिया, ताकि सफल प्रयासों से व्यावहारिक सीख लेकर उन्हें अन्य स्थानों पर अपनाया जा सके।
उन्होंने जल क्षेत्र के आंकड़ों को एक स्थान पर व्यवस्थित रूप से एकत्रित, प्रबंधित और विश्लेषित करने के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया। आंकड़ों के संग्रह और विश्लेषण में एक समान प्रारूप के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की भी सिफारिश की।
जल संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने पहले से अनुमान आधारित और समन्वित योजना बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कृषि और औद्योगिक कार्यों में शोधित जल के उचित उपयोग पर भी जोर दिया।















