नई दिल्ली, 03 सितंबर।
भारत और बेल्जियम ने रक्षा उद्योग में सहयोग को मजबूत करते हुए 10 महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौते किए हैं। इन समझौतों के तहत भारत में गोला-बारूद, 70 एमएम रॉकेट, नौसेना के लिए बारूदी सुरंग रोधी प्रणालियां, ड्रोन रोधी तकनीक और समुद्री डीजल इंजन सहित आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण तथा सह-उत्पादन का मार्ग खुलेगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ के साथ देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की भारत यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रैंकन के बीच उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता हुई। इस दौरान दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच दीर्घकालिक संरचनात्मक सहयोग के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों के रक्षा उद्योग संगठनों के बीच भी सहयोग समझौता हुआ।
बेल्जियम से 15 प्रमुख रक्षा कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा है। इन कंपनियों ने भारतीय रक्षा उद्योग के साथ आधुनिक सैन्य उपकरणों, रॉकेट, नौसैनिक प्रणालियों और ड्रोन रोधी तकनीक के निर्माण को लेकर करार किए हैं। बातचीत में यूरोप और हिंद-प्रशांत की सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा तथा सैन्य अधिकारियों के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। बेल्जियम डिफेंस कॉलेज ने वर्ष 2027 में भारत में ‘वर्ल्ड स्टडी ट्रिप’ आयोजित करने की योजना बनाई है।
लीज की रक्षा एवं इंजीनियरिंग कंपनी न्यू लाचौसे और टेम्पो क्लासिक इंजीनियरिंग के बीच करीब 5 करोड़ यूरो, यानी लगभग 450 करोड़ रुपये का समझौता हुआ है। इसके अंतर्गत गोला-बारूद के दो कैलिबर के लिए पूरी उत्पादन लाइन और दो अन्य कैलिबर के लिए आवश्यक टूलिंग उपलब्ध कराई जाएगी। प्रस्तावित संयंत्र में हर वर्ष करीब 10 करोड़ राउंड उत्पादन की क्षमता होगी और आपूर्ति वर्ष 2028 तथा 2029 में की जाएगी।
एक्साइल बेल्जियम और लार्सन एंड टुब्रो के बीच भारतीय नौसेना के बारूदी सुरंग रोधी पोतों के लिए स्वायत्त टूलबॉक्स उपलब्ध कराने का समझौता हुआ है। यह तकनीक समुद्र में बारूदी सुरंगों का पता लगाने, उनकी पहचान करने और उन्हें निष्क्रिय करने में सहायक होगी। शुरुआती चरण में 12 पोतों को शामिल किया जाएगा, जिसे आगे 59 जहाजों तक बढ़ाया जा सकता है।
थेल्स बेल्जियम और कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स के समझौते के तहत 70 एमएम रॉकेटों का संयोजन और निर्माण भारत में किया जाएगा। इस परियोजना में भारतीय आपूर्तिकर्ताओं की भी भागीदारी होगी। योजना के अनुसार वर्ष 2027 की शुरुआत में पूरी तरह भारत में निर्मित पहला रॉकेट तैयार हो सकता है।
एफएन हर्स्टल और कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स भारत में संयुक्त उत्पादन केंद्र स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस केंद्र में एफएन हथियारों, एकीकृत हथियार प्रणालियों और ड्रोन रोधी प्रणालियों का उत्पादन किया जाएगा। इससे आधुनिक हथियार प्रणालियों के स्थानीय निर्माण को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
ब्रुसेल्स की आतंकवाद-विरोधी सुरक्षा कंपनी पिटागोन और कृष्णा एलाइड मिलकर ‘पिटागोन इंडिया’ नाम से संयुक्त उद्यम स्थापित कर रहे हैं। इसमें पिटागोन की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत होगी। यह उद्यम वाहनों से होने वाले हमलों से सुरक्षा के लिए मोबाइल बैरियर तैयार करेगा और भारत में बने उत्पादों को दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों तक पहुंचाने की योजना है।
फ्लेमिश ड्रोन निर्माता सोलवन भारतीय बाजार में अपने ‘सबोटूर’ ड्रोन के साथ ‘बजकिल’ और ‘हिचहाइकर’ इंटरसेप्टर ड्रोन पेश करने के लिए डीजीवीके एंटरप्राइजेज के साथ सहयोग कर रही है। भारतीय सशस्त्र बलों ने इन प्रणालियों के परीक्षण में रुचि दिखाई है। ड्रोन और ड्रोन रोधी तकनीक में यह साझेदारी दोनों देशों के रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी।
ओआईपी सेंसर सिस्टम्स और इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड ने अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल प्रणालियों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। ओआईपी पहले ही अर्जुन एमके-1 के लिए 130 से अधिक साइट्स उपलब्ध करा चुकी है। कंपनी ने अर्जुन एमके-2 के लिए नया फायर-कंट्रोल सिस्टम भी विकसित किया है, जो लेजर-गाइडेड मिसाइल दागने में सक्षम है।
जॉन कॉकरिल डिफेंस और लार्सन एंड टुब्रो का सहयोग स्वदेशी हल्के टैंक ‘जोरावर’ से जुड़ा है। चीन सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा के लिए विकसित किए जा रहे इस टैंक के बुर्ज की आपूर्ति के लिए जॉन कॉकरिल डिफेंस प्रमुख दावेदार के रूप में उभरी है। इससे भारतीय हल्के टैंक कार्यक्रम में बेल्जियम की रक्षा तकनीक के उपयोग का रास्ता बन सकता है।
ऑक्टेव और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के बीच सहयोग भारतीय वायु रक्षा ढांचे को और मजबूत बनाने पर केंद्रित है। ऑक्टेव की तकनीक ‘आकाश तीर’, ‘अरुध्रा’, ‘आईपीएसएस’ और ‘आईएसीसीएस’ जैसे भारतीय वायु रक्षा कार्यक्रमों में भूमिका निभा रही है।
एंग्लो बेल्जियन कॉरपोरेशन और किर्लोस्कर के बीच भारत में 6 मेगावाट क्षमता वाले समुद्री डीजल इंजन के निर्माण पर बातचीत चल रही है। यह इस क्षमता का भारत में विकसित होने वाला पहला समुद्री डीजल इंजन होगा, जिसका भविष्य में नौसेना के बड़े युद्धपोतों के लिए महत्वपूर्ण उपयोग हो सकता है।















