हैदराबाद, 03 सितंबर।
तेलंगाना की वन मंत्री कोंडा सुरेखा को राज्य मंत्रिमंडल से हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से कैबिनेट से हटाने का निर्णय लिया और इस संबंध में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को सिफारिश भेजी जा चुकी है।
यह कार्रवाई प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति की सिफारिश के बाद की गई। समिति ने कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता द्वारा मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं के संबंध में की गई टिप्पणियों के मामले में कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए सुरेखा को मंत्रिमंडल से हटाने की सिफारिश की थी। अनुशासन समिति ने 20 अगस्त को अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ को सौंप दी थी।
कोंडा सुष्मिता ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ने अपने भाई की शेल कंपनी को मामूली कीमत पर एक कीमती जमीन देने की पेशकश की थी। इस मामले के सामने आने के बाद पार्टी के भीतर लगातार चर्चा और राजनीतिक हलचल बनी रही।
वन मंत्री कोंडा सुरेखा का कहना था कि उनकी बेटी की टिप्पणियों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके बावजूद कुछ विधायकों ने उनके खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की थी। बाद में पार्टी नेतृत्व ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री, वन मंत्री और अन्य कुछ मंत्रियों के साथ चर्चा की।
बैठकों के बाद पार्टी नेतृत्व ने कोंडा सुरेखा को मंत्रिमंडल से हटाने के फैसले को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही तेलंगाना योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद पर जी. चिन्ना रेड्डी की नियुक्ति भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है।
उनकी जगह तेलंगाना महिला आयोग की अध्यक्ष गदवाल विजयालक्ष्मी को योजना बोर्ड का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार नेरेल्ला शारदा को तेलंगाना महिला आयोग का नया अध्यक्ष बनाया गया है।
इस घटनाक्रम के बीच भाजपा विधायक राजा सिंह ने कोंडा सुरेखा को हटाए जाने के कारणों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि कथित रूप से पैसों के बंटवारे को लेकर हुए विवाद के कारण की जा रही है। उन्होंने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार को लेकर भी आरोप लगाए।















