नई दिल्ली, 03 सितंबर।
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की विस्तार से जांच के लिए संसद की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया गया है। लोकसभा बुलेटिन के अनुसार समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल किए गए हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
लोकसभा से गठित समिति में भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, कमलेश जांगड़े, मुकेशकुमार चंद्रकांत, निशिकांत दुबे, विष्णु दयाल राम, अनुराग नायक, अरविंद धर्मापुरी, एंटो एंटनी, कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस, मोहम्मद हमदुल्लाह सईद, काली चरण मुंडा, जिया उर रहमान, कल्याण बनर्जी, ए. राजा, लावू श्री कृष्ण देवयरायलु, नरेश गणपत म्हस्के, कौशलेंद्र कुमार, सुप्रिया सुले और मोहम्मद बशीर को सदस्य बनाया गया है।
राज्यसभा से सी. सदानंदन मास्टर, हर्षवर्धन श्रृंगला, उज्ज्वल देवराव निकम, डॉ. अलका गुर्जर, सत पाल शर्मा, प्रफुल्ल पटेल, संजय कुमार झा, क्रिस्टोफर मनिक्कम, डॉ. मेनका गुरुस्वामी और पी. विल्सन समिति में शामिल हैं।
केंद्र सरकार ने हाल में समाप्त हुए मानसून सत्र के दौरान विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 संसद में प्रस्तुत किया था। सरकार के अनुसार विधेयक का उद्देश्य विदेशी अंशदान और उससे निर्मित संपत्तियों के नियमन के लिए व्यापक कानूनी व्यवस्था तैयार करना है।
प्रस्तावित विधेयक में विदेशी धन से निर्मित संपत्तियों के प्रबंधन और उनके निस्तारण के लिए एक नामित प्राधिकरण की व्यवस्था करने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी अंशदान से जुड़ी संपत्तियों के नियमन की व्यवस्था अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
विपक्ष के साथ कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने विधेयक के कई प्रावधानों को लेकर चिंता जताई है। इन पक्षों ने विधेयक को वापस लेने अथवा इसके प्रावधानों पर व्यापक विचार-विमर्श कराने की मांग की थी।
इन आपत्तियों और विभिन्न पक्षों की चिंताओं के बाद विधेयक को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा गया। अब नई गठित समिति विधेयक के अलग-अलग प्रावधानों, उनके संभावित प्रभावों और संबंधित पक्षों की ओर से उठाए गए मुद्दों की विस्तार से जांच करेगी।














