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सरकार व नीतियाँ
03 Sep, 2026

संघ की सोच में नारी समाज को दिशा देने वाली शक्ति : शोभा विजेंद्र

भुवनेश्वर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ पुस्तक के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका और सहभागिता पर विस्तार से चर्चा हुई।

भुवनेश्वर, 03 सितंबर।

उत्कल बिपन्न सहायता समिति की ओर से दिल्ली की लेखिका एवं समाजसेविका डॉ. शोभा विजेंद्र की पुस्तक ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ पर विचारोत्तेजक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, ओडिशा की उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. स्मरप्रिया मिश्रा सम्मानित अतिथि रहीं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय स्त्री शक्ति की राष्ट्रीय सहसचिव चंदना दास ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के राष्ट्रीय सह संयोजक एवं सह प्रांत संघचालक मनसुख सेठिया भी उपस्थित रहे।

डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि संघ और महिलाओं की भूमिका को लेकर लंबे समय से अनेक भ्रांतियां और धारणाएं समाज में प्रचलित हैं, लेकिन संघ का इतिहास और उसके विचार महिलाओं की सहभागिता का अलग स्वरूप प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने वर्ष 1936 में वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के बीच हुए संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी आत्मीय सहयोग ने राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना का मार्ग तैयार किया।

उन्होंने कहा कि संघ की सोच में नारी की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं है। महिला को समाज को दिशा देने वाली शक्ति और राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण धुरी के रूप में देखा गया है। विभिन्न सरसंघचालकों के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी को सम्मान, नेतृत्व और राष्ट्रहित के साथ जोड़ा जाता रहा है।

डॉ. विजेंद्र ने बताया कि पुस्तक ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ का उद्देश्य तथ्यों और अनुभवों के माध्यम से संघ में महिलाओं की भागीदारी के वास्तविक स्वरूप को सामने लाना और प्रचलित भ्रांतियों को दूर करना है।

प्रो. डॉ. स्मरप्रिया मिश्रा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण की प्रमुख शक्ति रही है। वह संस्कारों की वाहक होने के साथ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं के सामने राष्ट्रसेवा और समाज निर्माण के अनेक अवसर हैं, जिनका उपयोग करते हुए जीवन को मातृभूमि के प्रति समर्पित किया जाना चाहिए।

चंदना दास ने पुस्तक को संघ परिवार की आत्मीयता, कुटुंब भावना और महिलाओं के योगदान का जीवंत दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि पुस्तक में महिला कार्यकर्ताओं के अनुभवों के साथ मुस्लिम महिलाओं की सहभागिता और लैंगिक समानता जैसे विषयों को भी स्थान दिया गया है। उन्होंने इसे महिला शक्ति की राष्ट्र निर्माण में भूमिका को समझने वाला प्रेरक उदाहरण बताया।

मनसुख सेठिया ने कहा कि संघ में महिलाओं की सहभागिता को लेकर समाज में जानबूझकर भ्रम फैलाया जाता है। संघ की स्थापना से लेकर आज तक राष्ट्र निर्माण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में महिलाओं की सक्रिय भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि पुरुषों और महिलाओं की शाखाओं का अलग होना केवल शारीरिक संरचना और कार्यपद्धति की आवश्यकता से जुड़ा है, इसमें सहभागिता के स्तर पर कोई अंतर नहीं है।

उन्होंने पुस्तक को तथ्यों, विचारों और अनुभवों का महत्वपूर्ण संकलन बताते हुए कहा कि यह प्रचलित धारणाओं को प्रमाणों के आधार पर स्पष्ट करने में उपयोगी साबित होगी।

मुख्य अतिथि सुरमा पाढ़ी ने लेखिका के लंबे सामाजिक जीवन और सेवा कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने पुस्तक में संकलित 34 से अधिक महिलाओं के अनुभवों और विचारों की सराहना करते हुए कहा कि यह महिला सहभागिता की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करती है।

उन्होंने कहा कि संघ की दृष्टि में महिला केवल परिवार की सदस्य नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति है। वंदनीय मौसी जी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज रूपी रथ में पुरुष रथी है तो महिला उसकी सारथी है।

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व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। शुभांक-4-6-8

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