मुंबई, 3 सितंबर।
अभिनेत्री स्वरा भास्कर द्वारा इस दृश्य में महिलाओं के सम्मान और यौन हिंसा के चित्रण को लेकर उठाए गए सवालों पर लेखक ने खुलकर अपनी बात रखी है।
कपाड़िया का कहना है कि फिल्म में दिखाए गए जौहर का पूरा प्रसंग गहरे ऐतिहासिक शोध और पुराने दस्तावेजों के आधार पर ही तैयार किया गया था।
उनके अनुसार उस दौर के हालात बेहद भयावह थे और फिल्म में उन्हीं परिस्थितियों को पूरी सच्चाई के साथ पर्दे पर उतारने का प्रयास किया गया था।
एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि कहानी के सभी घटनाक्रम इतिहास के पन्नों में दर्ज पुख्ता तथ्यों से मेल खाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि हर इंसान किसी भी दृश्य को अपने निजी नजरिए से देखता है, लेकिन उस युग की परंपराओं को उसी कालखंड के संदर्भ में देखना चाहिए।
कपाड़िया के मुताबिक वह समय 'करो या मरो' की स्थिति वाला था, जहां पुरुष योद्धा केसरिया बाना पहनकर रणक्षेत्र में उतरते थे।
हार तय होने की स्थिति में महिलाओं द्वारा जौहर करने की प्राचीन परंपरा का स्पष्ट उल्लेख कई ऐतिहासिक ग्रंथों में मिलता है।
स्वरा भास्कर की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए लेखक ने कहा कि इस विषय को लेकर शुरू हुई यह बहस पूरी तरह से अनावश्यक है।
उन्होंने तर्क दिया कि फिल्म देखने का अनुभव दर्शक की अपनी सोच पर निर्भर करता है, और नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति को अच्छी चीज में भी खामी दिखती है।
दूसरी ओर अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने एक खुले मंच पर 'पद्मावत' के इस दृश्य पर फिर से सवाल खड़े किए थे।
उनका मानना था कि यह फिल्मांकन यौन हिंसा की पीड़िताओं को एक गलत और नकारात्मक संदेश दे सकता है।
स्वरा ने फिल्म के एक हिस्से में गर्भवती महिला के भी जौहर वाले दृश्य पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई थी।















