भोपाल, 03 सितंबर।
एक पुरानी कहावत है कि जब घर के दो बुजुर्ग आपस में बात करना बंद कर दें तो घर बिखर जाता है। ठीक यही हाल आज दो महासागरों का है। प्रशांत महासागर, जो दुनिया का सबसे बड़ा बुजुर्ग है, और हिंद महासागर, जो भारत का पड़ोसी है, दोनों ने 70 साल से चली आ रही बातचीत बंद कर दी है। और जब समंदर चुप हो जाते हैं तो धरती पर तूफान बोलने लगते हैं।
वैज्ञानिकों ने इसे जलवायु संचार टूटना कहा है, लेकिन दर्शन कहता है कि यह प्रकृति का रूठना है। और जब प्रकृति रूठती है तो केवल मौसम नहीं बदलता, इंसान का मन भी सूखने लगता है।
क्या है यह टूटा हुआ संवाद?
पिछले 70 साल से प्रशांत और हिंद महासागर के बीच एक अदृश्य डोर थी। वैज्ञानिक उसे वॉकर सर्कुलेशन कहते हैं। प्रशांत में हवा उठती थी, हिंद महासागर में बादल बनते थे। प्रशांत में अल नीनो आता था तो हिंद महासागर अपना तापमान बदलकर भारत को संकेत देता था कि इस बार मानसून कमजोर रहेगा।
यह कोई किताबी फॉर्मूला नहीं था। यह प्रकृति का व्हाट्सएप था। दो समंदर आपस में चैट करते थे और उसी चैट से तय होता था कि भोपाल में कितनी बारिश होगी और विदिशा में गेहूं की फसल कैसी होगी।
अब यह चैट डिलीट हो रही है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 1950 के बाद हिंद महासागर 0.1 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक की दर से गर्म हुआ है, जबकि 1980 के दशक से प्रशांत महासागर का वॉकर सर्कुलेशन असामान्य रूप से मजबूत हो गया है। एक गर्म हो रहा है, दूसरा तेज भाग रहा है। दोनों के बीच की लय टूट गई है।
हमारे वेदों में लिखा है कि नदी और समंदर केवल पानी नहीं हैं, वे जीव हैं, उनमें प्राण हैं। जब हम समंदर को कचरा डालने की जगह समझते हैं, जब हम हवा में जहर घोलते हैं तो समंदर का प्राण घटता है और प्राण घटने पर संवाद टूटता है।
आज हमने प्रकृति को संसाधन समझ लिया है, उपयोग की वस्तु समझ लिया है। हमने सोचा कि समंदर में तेल डाल दो तो कुछ नहीं होगा, फैक्ट्री का धुआं आसमान में उड़ा दो तो हवा साफ रहेगी।
लेकिन समंदर सब याद रखता है। वह याद रखता है कि आपने कितना कार्बन जलाया है और उसी हिसाब से वह अपना तापमान बढ़ाता है।
तथ्य जो आपको हिला देंगे।
वैज्ञानिकों ने कोरल, पेड़ों के तने और गुफाओं में लटके स्टेलेग्माइट से पिछले 500 साल का इतिहास निकाला है। उस इतिहास में 1950 से 1980 तक दोनों महासागरों के बीच सबसे मजबूत रिश्ता था। 1980 के बाद से रिश्ता कमजोर होने लगा और 2019 के बाद से यह लगभग टूट चुका है।
हिंद महासागर दुनिया में सबसे तेजी से गर्म होने वाला महासागर बन गया है। यदि यही रफ्तार रही तो 2050 तक हिंद महासागर का तापमान इतना बढ़ जाएगा कि मानसून का पैटर्न पूरी तरह बदल जाएगा।
भारत में 60 प्रतिशत खेती आज भी मानसून पर निर्भर है। यदि मानसून बिगड़ा तो किसान बिगड़ेगा और किसान बिगड़ा तो देश बिगड़ेगा।
आपके भीतर का मानसून भी बिगड़ रहा है।
यह केवल बाहर के समंदर की कहानी नहीं है, यह आपके भीतर की भी कहानी है। जब बाहर का समंदर गर्म होता है तो आपके भीतर का मन भी गर्म होता है। बेचैनी बढ़ती है, नींद कम होती है, गुस्सा बढ़ता है।
यह कोई कविता नहीं है, यह विज्ञान है। जब तापमान बढ़ता है तो हमारे शरीर में तनाव के हार्मोन बढ़ते हैं।
प्रकृति से कटना ही सबसे बड़ा रोग है। हमने एसी में रहना सीख लिया है, लेकिन पेड़ के नीचे बैठना भूल गए हैं। हमने बोतल का पानी पीना सीख लिया है, लेकिन नदी में हाथ डालना भूल गए हैं।
प्रकृति से खिलवाड़ कैसे रोकें?
अपनी सोच बदलें। समंदर को कचरा घर मत समझें, नदी को नाला मत समझें। हर नदी, हर तालाब, हर समंदर में जीवन है।
कार्बन कम करें, गाड़ी कम चलाएं, बिजली बचाएं। एक पेड़ लगाएं और उसे अपने बच्चे जैसा पालें। एक पेड़ एक साल में 20 किलो कार्बन सोखता है और वही कार्बन समंदर को गर्म करता है।
स्थानीय को बचाएं।
भोपाल का बड़ा तालाब हो या इंदौर की कान्ह नदी, उसे साफ रखें, क्योंकि हर छोटा जल स्रोत अंत में समंदर से ही मिलता है।
बच्चों को सिखाएं।
स्कूल में ई-कचरा, प्लास्टिक और पानी की कहानी बताएं, ताकि अगली पीढ़ी समंदर से बात करना फिर सीख सके।
सरकार और समाज की जिम्मेदारी भी है।
ई-कचरा प्रबंधन नियम 2022 बन चुका है, लेकिन केवल नियम बनाने से कुछ नहीं होता, उसे लागू करना होगा। हर शहर में वैज्ञानिक तरीके से ई-कचरा निस्तारण केंद्र बने। उत्पादक कंपनियां अपनी जिम्मेदारी लें और अपना बेचा हुआ मोबाइल वापस लें।
किसानों के लिए नए मानसून मॉडल बने, जो केवल प्रशांत पर निर्भर न हों, बल्कि हिंद महासागर के तापमान को भी पढ़ें।
अंतिम अपील
समंदर की चिट्ठी पढ़िए।
समंदर ने एक चिट्ठी लिखी है और उस चिट्ठी में लिखा है कि आशा है, आप तेज रफ्तार जिंदगी और आधुनिकता के बीच सुरक्षित हैं। लेकिन हम दो भाई अब आपस में बात नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि आपने हमारे बीच में धुआं भर दिया है।
यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे मानसून देखें, खेत में धान लहराते देखें और सर्दी में कोहरा महसूस करें तो आज ही रुक जाइए। प्रकृति से खिलवाड़ बंद कीजिए। उसे पूजिए नहीं तो कम से कम उसे छेड़िए मत।
नहीं तो जब दो समंदर बात करना बंद कर देते हैं तो एक दिन आपके घर का नल भी बात करना बंद कर देगा और तब आपको समझ आएगा कि पानी केवल नल में नहीं आता, वह समंदर की बातचीत से आता है।
-सीमा नागर















