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संपादकीय
04 Sep, 2026

फ्री कोचिंग का नया सपना, क्या गांव का लाल भी अब बनेगा आईआईटियन और डॉक्ट, कोटा की लाखों की फीस से जूझते परिवारों के लिए दिल्ली से आई नई उम्मीद

केंद्र सरकार की प्रस्तावित निशुल्क कोचिंग व्यवस्था से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का नया अवसर मिलने की उम्मीद है।

नई दिल्ली, 04 सितंबर।

सोचिए, एक बच्चा जो सुबह सरकारी स्कूल में पढ़ता है, शाम को खेत में हाथ बंटाता है और रात में मोबाइल की रोशनी में डॉक्टर बनने का सपना देखता है। क्या वह कभी कोटा या दिल्ली की महंगी कोचिंग का खर्च उठा पाएगा? जवाब है नहीं। लेकिन अब शायद उसका सपना सपना नहीं रहेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से जो वादा किया था, अब शिक्षा मंत्रालय ने उस पर काम तेज कर दिया है और देश में पहली बार एक ऐसा विशाल कोचिंग नेटवर्क बनने जा रहा है, जो पूरी तरह मुफ्त होगा। 12वीं तक के स्कूल-कॉलेज के छात्रों से लेकर जेईई, नीट यूजी और बाद में एमएससी, यूपीएससी तक की तैयारी इसी एक मंच पर कराई जाएगी।

आंकड़ों में छिपा है देश के भविष्य का सच। इस समय साथी पोर्टल पर करीब 20 लाख छात्र पंजीकृत हैं और लक्ष्य है एक करोड़ छात्रों तक पहुंचने का। 24 घंटे सवाल पूछने की सुविधा होगी, यानी आधी रात को भी यदि किसी बच्चे को फिजिक्स का कोई सवाल समझ नहीं आया तो वह पूछ सकेगा और जवाब मिलेगा।

लेकिन मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का मानना है कि अब तक का साथी पोर्टल निजी कोचिंग संस्थानों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी नहीं बन पाया है। इसकी क्षमता इतनी नहीं है कि एक साथ 35 लाख जेईई-नीट यूजी के छात्रों को पढ़ा सके। इसलिए अब इसे नया रूप दिया जा रहा है।

आईआईटी कानपुर का साथी ऐप इस पूरी क्रांति का आधार बनने जा रहा है। इसे और प्रभावशाली बनाया जाएगा। प्रह्लाद जोशी ने पिछले दिनों मंत्रालय के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की और इसी ऐप की समीक्षा की गई।

अब योजना यह है कि कोचिंग के नेटवर्क से देशभर के स्कूल, कॉलेज और सीएससी यानी कॉमन सर्विस सेंटर को जोड़ा जाएगा, ताकि गांव का बच्चा अपने ही गांव के सेंटर पर जाकर लाइव क्लास ले सके और डाउट पूछ सके।

अक्सर कहा जाता है कि सरकारी चीज मुफ्त तो है, पर गुणवत्ता नहीं है। लेकिन इस बार सरकार ने इस धारणा को तोड़ने की तैयारी की है। इसमें देश के बड़े शिक्षण संस्थानों के प्रोफेसर गेस्ट फैकल्टी के रूप में पढ़ाएंगे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बच्चे की कमजोरी पहचानी जाएगी और उसी के अनुसार पढ़ाई कराई जाएगी। यदि किसी बच्चे को केमिस्ट्री में दिक्कत है तो सिस्टम उसे उसी विषय का ज्यादा अभ्यास कराएगा। यह सुविधा तो आज महंगे निजी ऐप भी ठीक से नहीं दे पाते। भाषा की दीवार भी टूटेगी।

निजी कोचिंग संस्थान अधिकतर अंग्रेजी में पढ़ाते हैं। हिंदी में भी आधी-अधूरी सामग्री होती है, लेकिन सरकार का नया प्लेटफॉर्म कई भारतीय भाषाओं में होगा, ताकि बिहार का बच्चा भोजपुरी या हिंदी में, तमिलनाडु का बच्चा तमिल में और महाराष्ट्र का बच्चा मराठी में भी पढ़ सके।

यह वही सपना है, जिसकी बात नई शिक्षा नीति में कही गई थी कि शिक्षा मातृभाषा में होनी चाहिए।

देश में कोचिंग का बाजार आज लाखों करोड़ का हो गया है। कोटा, दिल्ली और हैदराबाद में एक साल की फीस दो से तीन लाख तक पहुंच गई है। रहने-खाने का खर्च अलग। ऊपर से मानसिक दबाव के कारण हर साल कई बच्चे हताशा में गलत कदम उठा लेते हैं।

सरकार का यह मुफ्त प्लेटफॉर्म यदि सफल रहा तो इस लूट पर लगाम लगेगी। प्रतिभा पैसे के कारण दम नहीं तोड़ेगी और गांव-गरीब का बच्चा भी उसी मंच पर खड़ा हो सकेगा, जहां आज केवल अमीर परिवारों के बच्चे खड़े होते हैं।

रास्ता इतना आसान नहीं है। पहली चुनौती है इंटरनेट। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी नेटवर्क कमजोर है, बिजली की समस्या है। दूसरी चुनौती है शिक्षकों की कमी। क्या बड़े प्रोफेसर सच में गांव के बच्चों को पढ़ाने के लिए समय देंगे? तीसरी चुनौती है निजी कोचिंग लॉबी, जो नहीं चाहेगी कि सरकार का यह मॉडल सफल हो।

लेकिन सरकार का तर्क है कि उसका उद्देश्य व्यवसाय नहीं, बल्कि अवसर की समानता है। यदि 20 लाख छात्र पहले ही जुड़ चुके हैं तो यह भरोसा दिखाता है कि मांग बहुत बड़ी है।

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार फरवरी में होने वाली जेईई मेन परीक्षा से पहले इस नए प्लेटफॉर्म को लॉन्च कर दिया जाएगा, ताकि छात्रों को तुरंत लाभ मिल सके। बाद में सीयूईटी, एसएससी और यूपीएससी को भी इसमें जोड़ा जाएगा।

कहा जा रहा है कि कुछ ही हफ्तों में लाइव क्लास, मॉक टेस्ट और मेंटरशिप शुरू हो जाएगी, ताकि फरवरी में जेईई देने वाले छात्रों को फायदा मिल सके।

क्या यह शिक्षा में समानता का नया अध्याय है? यह केवल एक ऐप या पोर्टल नहीं है, यह सोच में बदलाव है। अब तक शिक्षा को बाजार बना दिया गया था। जिसके पास पैसा है, वही अच्छी तैयारी खरीद सकता था। लेकिन अब सरकार कह रही है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होनी चाहिए।

यदि गांव का बच्चा भी बिना एक रुपया खर्च किए आईआईटी या एम्स में पहुंचता है तो यह केवल उसकी जीत नहीं होगी, यह पूरे देश की जीत होगी। यह डिजिटल इंडिया का असली अर्थ होगा।

क्या यह प्लेटफॉर्म सच में कोटा की दीवारें गिरा पाएगा? क्या यह उन माता-पिता के आंसू पोंछ पाएगा, जो फीस के कारण अपने बच्चों के सपनों को मार देते हैं?

जवाब आने वाले महीनों में मिलेगा। लेकिन एक बात तय है कि नई उम्मीद ने देश के करोड़ों छात्रों में एक नई रोशनी जगा दी है और अब सबकी नजर इस बात पर है कि फ्री कोचिंग का यह बड़ा वादा जमीन पर कितना उतरता है।

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व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। शुभांक-4-6-8

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