नई दिल्ली, 04 सितंबर।
केंद्र सरकार ने ई-कॉमर्स के माध्यम से होने वाले निर्यात से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिया है। नए प्रावधान के तहत भारत में निर्मित वस्तुओं के विदेशों में निर्यात के लिए माल-सूची आधारित ई-कॉमर्स मॉडल अपनाने की अनुमति दे दी गई है। जुलाई में घोषित यह फैसला अब शुक्रवार से लागू हो गया है।
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से संबंधित नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को केवल भारत में बने उत्पादों के निर्यात के उद्देश्य से माल का भंडार रखने की अनुमति प्रदान की गई है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, ई-कॉमर्स कंपनियां भारत में निर्मित या उत्पादित वस्तुओं का स्टॉक केवल विदेशों में भेजने के लिए रख सकेंगी। विदेशी निवेश वाली कंपनियों को भारत में बना सामान अपने पास रखकर उसका निर्यात करने की सुविधा मिलेगी।
हालांकि इस व्यवस्था के तहत माल का भंडार रखकर देश के भीतर खुदरा बिक्री करने की अनुमति नहीं होगी। यानी यह प्रावधान केवल भारत में निर्मित वस्तुओं के निर्यात तक सीमित रहेगा।
मंत्रालय ने बताया कि आर्थिक मामलों के विभाग ने 2 सितंबर को जारी अधिसूचना के माध्यम से विदेशी मुद्रा प्रबंधन के गैर-ऋण साधन नियम, 2019 में इस संबंध में नया प्रावधान जोड़ा है।
नए नियमों के अनुसार ई-कॉमर्स इकाइयां विदेशी व्यापार नीति, 2023, प्रक्रिया पुस्तिका और माल एवं सेवाओं के निर्यात से जुड़े विदेशी मुद्रा प्रबंधन विनियम, 2015 के प्रावधानों के अनुरूप माल-सूची आधारित मॉडल अपना सकेंगी।
इस मॉडल के तहत केवल भारत में निर्मित या उत्पादित वस्तुओं को निर्यात के लिए भंडारित किया जा सकेगा और नियमों के अनुसार उनका विदेशों में निर्यात किया जा सकेगा।















