भोपाल, 04 सितंबर।
मध्य प्रदेश में अब स्टेट हाइवे पर सफर करना महंगा हो गया है। सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए स्टेट हाइवे एक्ट में संशोधन कर दिया है। अब नेशनल हाइवे की तरह स्टेट हाइवे पर भी यूजर फीस वसूली जाएगी। इस फैसले के बाद प्रदेश के 12 हजार किलोमीटर लंबे स्टेट हाइवे नेटवर्क पर चलने वाले हर वाहन को टोल देना होगा। सरकार को इससे सालाना 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व मिलने का अनुमान है।
राज्य सरकार ने मप्र राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026 को मंजूरी देकर गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके तहत धारा 8 ए जोड़ी गई है। इस धारा के तहत सरकार किसी भी स्टेट हाइवे या उसके किसी हिस्से को यूजर फीस के दायरे में ला सकती है। सरकार चाहे तो किसी एजेंसी या निजी व्यक्ति को भी टोल वसूलने के लिए अधिकृत कर सकती है। पहले स्टेट हाइवे पर टोल वसूलने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था, लेकिन अब सरकार के पास पूरा अधिकार आ गया है।
सरकार को अभी भी मिल रहा है 500 करोड़ का राजस्व
अभी भी प्रदेश में स्टेट हाइवे और नेशनल हाइवे से सरकार को बड़ा राजस्व मिल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में मध्य प्रदेश ने 4343.552 करोड़ रुपये का टोल वसूला है और इस मामले में वह देश में सातवें स्थान पर है। देश में सबसे ज्यादा टोल उत्तर प्रदेश में वसूला जाता है, उसके बाद महाराष्ट्र और गुजरात का नंबर आता है।
मध्य प्रदेश में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है और सड़कों का जाल भी फैल रहा है। ऐसे में टोल से होने वाली आय में और वृद्धि तय है।
प्रदेश में वाहन चालकों पर पहले से ही ज्यादा बोझ है। मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल है, जहां पेट्रोल-डीजल पर सबसे ज्यादा वैट वसूला जाता है। पेट्रोल पर वैट के मामले में प्रदेश देश के टॉप तीन राज्यों में है। यहां पेट्रोल पर 26.70 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 16.70 रुपये प्रति लीटर वैट लिया जाता है।
ऐसे में जब स्टेट हाइवे पर भी टोल लगेगा तो आम आदमी पर दोहरी मार पड़ेगी। लोगों का कहना है कि एक तरफ महंगा ईंधन और दूसरी तरफ महंगा टोल, सफर करना मुश्किल हो जाएगा।
12 हजार किमी का है स्टेट हाइवे नेटवर्क
मध्य प्रदेश में स्टेट हाइवे का नेटवर्क बहुत बड़ा है। करीब 12 हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबा यह नेटवर्क प्रदेश के हर जिले को जोड़ता है। इन सड़कों का निर्माण और रखरखाव लोक निर्माण विभाग करता है।
सरकार का कहना है कि सड़कों को अच्छी हालत में बनाए रखने के लिए भारी खर्च करना पड़ता है और इस खर्च की भरपाई के लिए यूजर फीस जरूरी है। सरकार का तर्क है कि अच्छी सड़क से समय की बचत होती है, ईंधन कम लगता है और गाड़ी के रखरखाव का खर्च भी कम होता है। इसलिए जो लोग इसका उपयोग कर रहे हैं, उन्हें थोड़ा शुल्क देना चाहिए।
अभी तक टोल की दरें तय नहीं हुई हैं। लोक निर्माण विभाग जल्द ही एक नई टोल नीति लाएगा। इसमें बताया जाएगा कि किस सड़क पर कितना टोल लगेगा और किस तरह के वाहन से कितनी फीस ली जाएगी।
आमतौर पर टोल में छोटे वाहनों के लिए कम और बड़े व्यावसायिक वाहनों के लिए ज्यादा दर रखी जाती है। टू-व्हीलर को अक्सर टोल से छूट दी जाती है, लेकिन नए कानून में इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है। सरकार का कहना है कि टोल की दर तय करते समय सड़क पर वाहनों की संख्या, सड़क की लागत और रखरखाव के खर्च को ध्यान में रखा जाएगा।
सरकार के इस फैसले से आम जनता और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में नाराजगी है। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि पहले ही माल भाड़ा बहुत बढ़ गया है और अब स्टेट हाइवे पर भी टोल लगने से ट्रांसपोर्ट और महंगा हो जाएगा।
इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा, क्योंकि जब ट्रक का खर्च बढ़ेगा तो फल, सब्जी, अनाज और अन्य सामान भी महंगे होंगे। बस ऑपरेटरों का भी कहना है कि उन्हें भी किराया बढ़ाना पड़ेगा, जिससे आम यात्रियों की जेब पर असर पड़ेगा।
यूजर फीस का सिद्धांत सही है। पूरी दुनिया में अच्छी सड़कों के लिए टोल लिया जाता है, लेकिन इसके साथ सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। यदि सरकार टोल ले रही है तो सड़क पर सुरक्षा गश्त, क्रेन, एंबुलेंस और शौचालय जैसी सुविधाएं भी होनी चाहिए। सड़क पर गड्ढे नहीं होने चाहिए और साइन बोर्ड स्पष्ट होने चाहिए।
कई राज्यों में स्थानीय लोगों को टोल में छूट दी जाती है या मासिक पास की व्यवस्था है। मध्य प्रदेश में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों पर ज्यादा बोझ न पड़े।
सरकार इस फीस से मिलने वाले पैसे को एक खास फंड में रखेगी और उसी पैसे से सड़कों का विकास और रखरखाव किया जाएगा। इससे सरकार पर बजट का बोझ कम होगा और सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
सरकार का लक्ष्य है कि अगले वित्तीय वर्ष से इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाए। पहले चरण में उन सड़कों पर टोल लगाया जाएगा, जो हाल ही में बनी हैं और जिन पर ट्रैफिक ज्यादा है। धीरे-धीरे सभी स्टेट हाइवे को इसके दायरे में लाया जाएगा।
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में अब स्टेट हाइवे पर सफर करना जेब पर भारी पड़ेगा। सरकार के लिए यह राजस्व का बड़ा जरिया बनेगा, लेकिन आम आदमी के लिए यह महंगाई की एक और वजह बन सकता है।
अब देखना होगा कि सरकार टोल के बदले जनता को कितनी अच्छी सड़क और सुविधाएं देती है। यदि अच्छी सड़क और सुरक्षा मिलती है तो लोग टोल देने को तैयार हो जाएंगे, लेकिन यदि सड़कें खराब रहीं और केवल वसूली होती रही तो विरोध होना तय है।















