ग्वालियर-चंबल संभाग के एक मामले ने कथनी और करनी में अंतर साफ बता दिया है। गंभीर अपराध के बाद भी मध्य प्रदेश पुलिस की नजरों से बचकर रहना बहुत गंभीर लापरवाही का नतीजा है। जो स्वयं गंभीर अपराध में आरोपित हों, उन्हें ही अब अपराधियों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी आखिर किसने दी?















