भोपाल, 04 सितंबर।
भोपाल में तैयार हो रहा है नया मास्टर प्लान। हर उत्पाद को मिलेगा ब्रांड का ताज। मध्य प्रदेश अब सिर्फ अनाज और कला का प्रदेश नहीं, बल्कि डिजाइन का हब बनने जा रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार एक ऐसा बड़ा कदम उठाने जा रही है, जो राज्य की पूरी तस्वीर बदल देगा। जनवरी 2027 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले सरकार एक नई और क्रांतिकारी डिजाइन पॉलिसी लाने की तैयारी में जुट गई है।
इस पॉलिसी का मकसद है राज्य के हर क्षेत्र को नया रूप देना। चाहे वह खेत में चलने वाला ट्रैक्टर हो या आदिवासी महिला के हाथ से बनी चंदेरी साड़ी, अब सब कुछ नए डिजाइन में दुनिया के सामने आएगा।
अटल सुशासन संस्थान और एनआईडी भोपाल ने मिलाया हाथ
इस पूरी नीति को बनाने की जिम्मेदारी अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) भोपाल को दी गई है।
दोनों संस्थान मिलकर एक ऐसा रोडमैप तैयार कर रहे हैं, जो मध्य प्रदेश को देश का पहला डिजाइन ड्रिवन स्टेट बना देगा। अभी तक केंद्र सरकार के पास तो डिजाइन पॉलिसी है, लेकिन किसी भी बड़े राज्य के पास अपनी खुद की पॉलिसी नहीं है।
मध्य प्रदेश इस कमी को पूरा कर देश में मिसाल कायम करना चाहता है।
इस नीति में क्या होगा खास, जो आज तक नहीं हुआ?
खेती को मिलेगी नई ताकत। इस नीति के तहत किसानों के औजारों को पूरी तरह से बदला जाएगा। ट्रैक्टर, सीड ड्रिल, कल्टीवेटर, स्प्रेयर जैसे उपकरणों को किसानों की जरूरत के हिसाब से हल्का, मजबूत और सस्ता बनाया जाएगा, ताकि छोटे किसान भी आधुनिक खेती कर सकें और उनकी पैदावार दोगुनी हो सके।
कारीगरों की चमकेगी किस्मत। मध्य प्रदेश बाग प्रिंट, गोंड पेंटिंग, भील आर्ट, चंदेरी और महेश्वरी साड़ियों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, लेकिन अच्छी पैकेजिंग और ब्रांडिंग न होने से कारीगरों को सही दाम नहीं मिल पाता।
नई पॉलिसी में इन उत्पादों की पैकेजिंग, लुक और ब्रांडिंग को इंटरनेशनल लेवल का बनाया जाएगा, ताकि विदेशी बाजार में भी ये उत्पाद ऊंचे दाम पर बिक सकें।
डिजाइन चोरी पर लगेगा ताला। सबसे बड़ी समस्या है डिजाइनों की चोरी। कई बार बड़े व्यापारी स्थानीय कारीगरों के डिजाइन चुराकर बाजार में बेच देते हैं।
नई नीति में पेटेंट और कानूनी सुरक्षा का प्रावधान होगा, जिससे कारीगरों की मेहनत का हक सिर्फ उन्हें ही मिलेगा और कोई भी उनकी नकल नहीं कर सकेगा।
सरकारी दफ्तर भी दिखेंगे कॉर्पोरेट जैसे। सिर्फ उत्पाद ही नहीं, बल्कि सरकारी अस्पताल, स्कूल और पर्यटन स्थलों को भी नए डिजाइन में सजाया जाएगा, ताकि आम जनता को बेहतर सुविधा और अच्छा अनुभव मिल सके।
आज का जमाना सिर्फ चीज बनाने का नहीं, बल्कि उसे सुंदर और यूजर फ्रेंडली बनाने का है। यदि कोई उत्पाद दिखने में अच्छा नहीं होगा तो बाजार में नहीं बिकेगा।
वैश्विक बाजार में टिकने के लिए लुक और पैकेजिंग ही सबसे बड़ा हथियार है। जब तक हमारे उत्पादों का डिजाइन इंटरनेशनल लेवल का नहीं होगा, तब तक हम चीन और यूरोप के उत्पादों से मुकाबला नहीं कर सकते।
इसलिए यह नीति केवल फैशन नहीं, बल्कि आर्थिक जरूरत है।
बड़े फायदे जो बदल देंगे प्रदेश की तस्वीर
सोच और विजन को नई दिशा मिलेगी। बिना नीति के काम बिखरा रहता है। नीति बनने से सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थान एक ही मंच पर आएंगे।
दूसरा फायदा होगा समस्याओं का आसान समाधान। डिजाइन थिंकिंग से किसी भी समस्या की जड़ तक जाकर उसका हल निकाला जाएगा।
तीसरा फायदा होगा आर्थिक विकास और रोजगार। उत्पादों की मांग देश और विदेश में बढ़ेगी तो उद्योग बढ़ेंगे और युवाओं को रोजगार मिलेगा।
चौथा फायदा होगा संसाधनों का सही इस्तेमाल। समय और धन दोनों की बचत होगी।
लोकल से ग्लोबल तक का सफर होगा आसान
मुख्यमंत्री का सपना है कि मध्य प्रदेश का हर गांव आत्मनिर्भर बने और हर उत्पाद ग्लोबल बने। यह डिजाइन पॉलिसी उसी सपने को पूरा करने की सीढ़ी है।
जब एक छोटे से गांव में बना उत्पाद विदेश में बिकेगा तो न केवल कारीगर की आय बढ़ेगी, बल्कि प्रदेश का नाम भी रोशन होगा।
यह नीति लोकल को वोकल बनाने के साथ-साथ ग्लोबल बनाने का सबसे बड़ा मंत्र साबित होगी।















