नई दिल्ली, 04 सितंबर।
उच्च शिक्षा की तस्वीर बदल रही है और यह बदलाव बेटियों के हौसले से आया है। ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन यानी एआईएसएचई की 2023-24 की रिपोर्ट बताती है कि पिछले दस साल में उच्च शिक्षा में 1 करोड़ 8 लाख विद्यार्थी बढ़े हैं और इसमें अकेले 67 लाख बेटियां हैं।
यानी उच्च शिक्षा से जुड़े हर 100 नए विद्यार्थियों में 62 बेटियां हैं।
वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा में 3 करोड़ 42 लाख विद्यार्थी नामांकित थे, जो 2023-24 में बढ़कर 4 करोड़ 50 लाख हो गए।
लड़कों की संख्या में लगभग 41 लाख की बढ़ोतरी हुई, जबकि लड़कियों की संख्या में 67 लाख की बढ़ोतरी हुई। बेटियों ने इस दौड़ में लड़कों को पीछे छोड़ दिया है।
दस राज्यों में तो छात्राओं का नामांकन छात्रों से ज्यादा हो गया है। लेकिन सवाल है कि आखिर लड़के कहां जा रहे हैं।
उच्च शिक्षा से दूर रहने की पांच बड़ी वजहें हैं। पहली, पढ़ाई का खर्च। फीस, किताब, परिवहन और हॉस्टल का बोझ गरीब परिवारों पर पड़ता है।
दूसरी, रोजगार और कमाई की जरूरत। बच्चे जल्दी काम शुरू कर देते हैं।
तीसरी, स्कूल से कॉलेज के बीच का गैप। कॉलेज की उपलब्धता, दूरी और प्रवेश प्रक्रिया बाधा बनती है।
चौथी, पढ़ाई में कमजोर प्रदर्शन और पांचवीं, खासकर लड़कियों के लिए सामाजिक कारण - घरेलू जिम्मेदारी, विवाह, सुरक्षा और परिवार की प्राथमिकताएं।
लड़कों के पिछड़ने की बड़ी वजह रोजगार की मजबूरी है। कई लड़के 18 साल के बाद ही काम की तलाश में लग जाते हैं।
उन्हें लगता है कि तीन-चार साल डिग्री में लगाने से बेहतर है कि कोई हुनर सीखकर कमाना शुरू कर दें। लेकिन यह फैसला उनके अवसर सीमित कर सकता है।
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू है कि संस्थान बढ़े हैं, लेकिन नामांकन की रफ्तार उतनी नहीं बढ़ी।
वर्ष 2014-15 में देश में 760 विश्वविद्यालय थे, जो 2023-24 में 1,289 हो गए। कॉलेजों की संख्या 38,498 से बढ़कर 48,246 हो गई।
इसके बावजूद 18 से 23 वर्ष के युवाओं का सकल नामांकन अनुपात यानी जीईआर करीब 30 प्रतिशत ही है। यानी इस आयु वर्ग के करीब 70 प्रतिशत युवा उच्च शिक्षा की दहलीज तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
मध्य प्रदेश में 14.4 लाख छात्र और 13.3 लाख छात्राओं का नामांकन है। राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कॉलेजों की संख्या बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है।
जब तक पढ़ाई की गुणवत्ता, रोजगार से जुड़ाव और किफायती शिक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक जीईआर नहीं बढ़ेगा।
नामांकन बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा को रोजगार उपयोगी बनाना जरूरी है। विद्यार्थी और परिवार को डिग्री के बाद रोजगार की स्पष्ट संभावना दिखाई देनी चाहिए।
बेटियों की उड़ान स्वागतयोग्य है, लेकिन लड़कों का पिछड़ना भी खतरे की घंटी है।
जरूरत है कि स्कूल से कॉलेज के बीच का गैप पाटा जाए, फीस और परिवहन का बोझ कम किया जाए तथा डिग्री को रोजगार से जोड़ा जाए।
तभी बेटियों की यह उड़ान समाज की उड़ान बनेगी और कोई भी युवा उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।














