न्यूयॉर्क, 05 सितंबर।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को दुनिया के महाद्वीपों के वास्तविक आकार को अधिक सटीक रूप में दिखाने वाले नए विश्व मानचित्र को अपनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। नए मानचित्र में अफ्रीका को अधिक वास्तविक आकार में दर्शाया गया है, जबकि उत्तरी अमेरिका और यूरोप का आकार पहले की तुलना में कम दिखाई देगा।
इस प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला। अमेरिका ने इसके विरोध में मतदान किया, जबकि छह देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। नए मानचित्र को इक्वल अर्थ मानचित्र प्रक्षेपण के नाम से जाना जाता है।
प्रस्ताव का उद्देश्य विश्व के मानचित्रण को अधिक सटीक बनाना है। सदस्य देशों से पारंपरिक मर्केटर प्रक्षेपण के स्थान पर इक्वल अर्थ मानचित्र अपनाने का आग्रह किया गया है।
मर्केटर प्रक्षेपण का निर्माण फ्लेमिश मानचित्रकार जेरार्डस मर्केटर ने वर्ष 1569 में समुद्री नौवहन के लिए किया था। यह प्रणाली भूमि के आकार और कोणों को बनाए रखने में उपयोगी रही, लेकिन महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल को सही अनुपात में नहीं दिखाती।
पृथ्वी के त्रि-आयामी स्वरूप को दो-आयामी सतह पर उतारने की चुनौती के कारण मर्केटर मानचित्र में आकारों का अंतर दिखाई देता है। उत्तरी क्षेत्रों के भूभाग बड़े नजर आते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के आसपास के क्षेत्रों का आकार वास्तविकता से छोटा दिखता है।
इसी कारण यूरोप और उत्तरी अमेरिका मानचित्र पर वास्तविक अनुपात से काफी बड़े दिखाई देते हैं। दूसरी ओर अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना में छोटा नजर आता है।
प्रस्ताव को प्रायोजित करने वाले टोगो का कहना है कि मानचित्र दुनिया को समझने के लोगों के नजरिये को प्रभावित करते हैं। उसके अनुसार, मानचित्र शिक्षा, कल्पनाशक्ति और सामूहिक धारणाओं को दिशा देते हैं।
टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने कहा कि मानचित्र कभी पूरी तरह तटस्थ नहीं होते। यदि वे पृथ्वी की विकृत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं तो गलत धारणाएं पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ सकती हैं।
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि महासभा को अधिक महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अमेरिकी प्रतिनिधि यारीना फेरेंसविच ने मतदान से पहले कहा कि इस तरह की पहल से संस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।
इक्वल अर्थ प्रक्षेपण को मानचित्रकारों के एक समूह ने विकसित किया था और इसे वर्ष 2018 में प्रस्तुत किया गया। इसमें अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, दक्षिण एशिया और ओशिनिया के भूभागों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अधिक निकट दिखाया गया है।
इस प्रक्षेपण से जुड़े मानचित्रकार बोजन सावरिक ने कहा था कि इक्वल अर्थ महाद्वीपों के सापेक्ष सतही क्षेत्रफल को सुरक्षित रखता है और उनके आकार को यथासंभव पृथ्वी के ग्लोब जैसा दिखाने का प्रयास करता है।
फ्रांस, जिसने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, ने शुक्रवार को मर्केटर प्रक्षेपण को छोड़ने की घोषणा भी की। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने कहा कि मौजूदा मानचित्र में अमेरिका, रूस और चीन को अफ्रीका, लैटिन अमेरिका तथा दक्षिण-पूर्व एशिया की तुलना में असमान रूप से अधिक प्रमुखता मिलती है।
उन्होंने कहा कि मर्केटर प्रक्षेपण में ग्रीनलैंड लगभग अफ्रीका जितना बड़ा दिखाई देता है। उनके अनुसार, मानचित्र बदलने से दुनिया नहीं बदलती, लेकिन विकृत प्रस्तुति को सुधारना सच्चाई की दिशा में एक कदम है।
यह पहल ऐसे समय सामने आई है, जब फ्रांस अफ्रीका के साथ अपने संबंध बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है। खासकर उन पूर्व उपनिवेशों के साथ, जहां उसके संबंध लंबे समय से चुनौतीपूर्ण रहे हैं।















