मोंटेवीडियो, 05 सितंबर।
उरुग्वे में घरेलू पोल्ट्री में अत्यधिक रोगजनक एच5 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस की पुष्टि होने के बाद सरकार ने पूरे देश में स्वास्थ्य आपातकाल लागू कर दिया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पोल्ट्री की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
सरकार ने पक्षियों से जुड़े मेलों, नीलामी और सार्वजनिक प्रदर्शनियों के आयोजन पर भी रोक लगा दी है। दक्षिण-पश्चिमी कोलोनिया क्षेत्र में संक्रमण की पुष्टि के बाद यह कदम उठाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में पक्षियों की मौत के बाद जांच शुरू की गई थी। शुरुआती त्वरित जांच में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन बाद में सरकारी प्रयोगशाला की जांच में एच5 वायरस की मौजूदगी सामने आई।
आपातकालीन आदेश के तहत प्रभावित इलाकों में विशेष प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। गैर-व्यावसायिक रूप से पाले जाने वाले पक्षियों को घरेलू स्तर पर एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने पर रोक लगाई गई है।
हालांकि, सरकारी पोल्ट्री निगरानी प्रणाली में पंजीकृत पक्षियों को कुछ विशेष परिस्थितियों में इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। अधिकारियों ने खुले में घूमने वाले घरेलू पक्षियों को बंद और ढकी हुई जगहों में रखने के निर्देश दिए हैं।
इसका उद्देश्य घरेलू पक्षियों को जंगली पक्षियों के संपर्क में आने से रोकना है। प्रभावित क्षेत्र में संक्रमित और संपर्क में आए पक्षियों को मारकर सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
संभावित रूप से दूषित स्थानों और सामग्री की व्यापक सफाई तथा कीटाणुशोधन किया जा रहा है। पोल्ट्री उत्पादकों को संक्रमण रोकने के लिए कड़े जैव-सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
इन उपायों में बिना अनुमति लोगों और वाहनों की आवाजाही रोकना, पक्षियों के पानी और चारे को जंगली पक्षियों से सुरक्षित रखना तथा नियमित कीटाणुशोधन शामिल है।
अधिकारियों ने कहा कि पोल्ट्री का मांस और अंडे उचित तरीके से संभालकर और पकाकर खाने पर सामान्य तौर पर मनुष्यों के लिए स्वास्थ्य जोखिम नहीं है। संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आए लोगों पर कृषि और स्वास्थ्य विभाग की टीमें नजर रख रही हैं।
एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा का अत्यधिक रोगजनक उपप्रकार है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करता है। संक्रमित पक्षियों के निकट संपर्क में आने पर मनुष्यों में भी संक्रमण हो सकता है, हालांकि मनुष्य से मनुष्य में इसके लगातार फैलने के प्रमाण नहीं मिले हैं।
अधिकारियों ने लोगों से बीमार या मृत पक्षियों को सीधे हाथ न लगाने की अपील की है। ऐसे किसी भी मामले की जानकारी तुरंत संबंधित स्वास्थ्य या पशु चिकित्सा अधिकारियों को देने को कहा गया है।















