उज्जैन, 05 सितंबर।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विशेष पूजन और दिव्य श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब चार बजे मंदिर के पट खुलने के बाद गर्भगृह में विराजित भगवान की प्रतिमाओं का पूजन किया गया और ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक हुआ।
इसके बाद पंचामृत से भगवान महाकाल का अभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से पूजन संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की गई।
भस्म आरती से पहले बाबा महाकाल का मनोहारी श्रृंगार किया गया। भगवान को चंदन का लेप, भांग, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित फूलों की मालाएं अर्पित की गईं।
मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल का श्रृंगार किया गया। बाबा को डमरू एवं शेषनाग का रजत मुकुट धारण कराया गया। रजत ॐ, रजत मुंडमाल और अन्य रजत आभूषणों से भी भगवान महाकाल का विशेष अलंकरण किया गया।
भस्म अर्पित कर संपन्न हुई आरतीकपूर आरती के बाद भगवान को नैवेद्य अर्पित किया गया। इसके पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर विधि-विधान के साथ भस्म अर्पित की गई। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भी भगवान महाकाल को भस्म समर्पित की गई।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके बाद भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन हुआ तथा महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।
जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसरभस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भक्तों ने बाबा महाकाल के साथ नंदी महाराज के दर्शन भी किए और उनसे अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना की।
कई श्रद्धालु नंदी महाराज के कान के पास अपनी इच्छा कहते नजर आए। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने भस्म आरती के दर्शन कर भगवान का आशीर्वाद लिया और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की।















