चेन्नई, 7 सितंबर।
तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को उस समय भारी हंगामा हो गया, जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने डीएमके और उसके नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सरकारिया आयोग की रिपोर्ट, वीरानम प्रकरण और पार्टी फंड से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री के जवाबी भाषण के दौरान शुरुआत में शांत रहे डीएमके विधायक बाद में नारेबाजी करने लगे और पर्चे लहराए। विजय ने अपने निर्धारित भाषण से हटकर कई मामलों का उल्लेख करते हुए डीएमके नेताओं पर परिवारवाद के आरोप लगाए, जिसके बाद सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
विरोध कर रहे विधायक अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में एमजी रामचंद्रन के गीतों और कवि कन्नदासन के शब्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने मीसा के इतिहास को लेकर भी डीएमके पर निशाना साधा।
विजय ने कहा कि वह अन्नादुरै और एमजी रामचंद्रन की परंपरा से जुड़े हैं। डीएमके सदस्यों ने मुख्यमंत्री के आरोपों का जवाब देने की अनुमति मांगी, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की।
अध्यक्ष ने कहा कि डीएमके विधायकों का उद्देश्य मुख्यमंत्री के भाषण को लोगों तक पहुंचने से रोकना था। उन्होंने सदस्यों से कहा कि पहले मुख्यमंत्री के नहीं बोलने की शिकायत की गई और जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो उन्हें एक मिनट तक बोलने नहीं दिया गया।
डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि विपक्ष के नेता को जवाब देने की अनुमति दिलाने के लिए अध्यक्ष से बात करें। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि यह निर्णय केवल विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में है।
धरने पर बैठे कुछ विधायकों को उठने में परेशानी हुई तो मुख्यमंत्री विजय ने एक विधायक की मदद कर उन्हें खड़ा किया। इसके बाद विजय ने अध्यक्ष से डीएमके सदस्यों को बोलने का अवसर देने का आग्रह भी किया।
डीएमके विधायक अपनी सीटों पर लौट आए, लेकिन अध्यक्ष ने उन्हें बोलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि सदस्यों ने मुख्यमंत्री को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया था।















