एक बड़े साहब इन दिनों अपने ऊपर लगे चार्ज हटवाने और फिर से मुख्यधारा की सक्रिय राजनीति में एंट्री लेने की गुहार लगा रहे हैं।साहब का तर्क भी बड़ा दिलचस्प है—जब बहुत से लोगों पर कत्ल जैसे गंभीर मामलों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो हम निरपराध होकर भी वनवास क्यों काटें? साहब को अब शायद वनवास से ज्यादा राजनीति का मोह सता रहा है।















