मध्यप्रदेश की राजनीति में पिछले दिनों हुए घटनाक्रमों के बाद खुद को हाशिए पर मानकर राजनीतिक सूर्यास्त की ओर बढ़ रहे एक नेताजी को ओरछा में मिले महत्व ने एक बार फिर उड़ान की उम्मीद जगा दी है।सहयोगी और शुभचिंतक इसे सिर्फ माननीय के लिए नहीं, बल्कि उनसे जुड़े कार्यकर्ताओं के लिए भी संजीवनी मान रहे हैं। अब देखना यह है कि ओरछा की मिली ऑक्सीजन कितनी देर तक राजनीतिक सांसें चलाती है और कब फिर से साहब का इंजन स्टार्ट होता है।















