भोपाल, 08 सितंबर।
राजधानी में सोशल मीडिया के माध्यम से आपत्तिजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाली सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। भोपाल पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने जन सुरक्षा और लोक शांति बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं।
आदेश के अनुसार फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स, इंस्टाग्राम, हाईक, एसएमएस, टेलीग्राम सहित अन्य इंटरनेट माध्यमों का उपयोग धार्मिक, सामाजिक या जातिगत भावनाएं भड़काने और वैमनस्य फैलाने के लिए नहीं किया जा सकेगा।
किसी भी मंच पर ऐसी पोस्ट, फोटो, वीडियो या ऑडियो प्रसारित करने पर रोक रहेगी, जिससे धार्मिक, सामाजिक अथवा जातिगत भावनाएं भड़कने या सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की आशंका हो। भड़काऊ सामग्री को टिप्पणी करना, पसंद करना, साझा करना या आगे भेजना भी प्रतिबंधित किया गया है। समूह संचालकों की जिम्मेदारी होगी कि वे अपने समूहों में इस तरह की सामग्री के प्रसार को रोकें।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी व्यक्ति इंटरनेट माध्यमों के जरिए समुदायों के बीच घृणा, वैमनस्य या हिंसा फैलाने का प्रयास नहीं करेगा और न ही किसी अन्य व्यक्ति को इसके लिए उकसाएगा। अफवाह, तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने या उन्माद फैलाने वाली सामग्री के प्रसार पर भी रोक लगाई गई है। ऐसी सामग्री को साझा करने या आगे भेजने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकेगी।
किसी व्यक्ति, संगठन या समुदाय को गैरकानूनी गतिविधियों के लिए एकत्र होने का आह्वान करने वाले संदेशों का प्रसार भी प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे संदेशों पर विशेष रोक लगाई गई है, जिनसे कानून और शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो।
भोपाल नगर सीमा में संचालित साइबर कैफे के लिए भी नियम तय किए गए हैं। संचालक किसी अज्ञात व्यक्ति को विश्वसनीय पहचान पत्र के बिना कैफे का उपयोग नहीं करने देंगे। प्रत्येक उपयोगकर्ता का हस्तलिखित नाम, पता, दूरभाष नंबर और पहचान संबंधी प्रमाण रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा।
साइबर कैफे में कैमरे की व्यवस्था भी जरूरी की गई है, ताकि आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की तस्वीर दर्ज हो सके और उसका अभिलेख सुरक्षित रखा जाए। पुलिस आयुक्त का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और आगामी दो माह तक प्रभावी रहेगा।
आदेश अथवा इसके किसी प्रावधान का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा।















