अनूपपुर, 08 सितम्बर।
जिला चिकित्सालय की पार्किंग वाहन चोरों के निशाने पर बनी हुई है। अस्पताल परिसर से लगातार दोपहिया वाहन चोरी होने के मामले सामने आ रहे हैं। बीते एक वर्ष में परिसर और आसपास से 11 से अधिक बाइक चोरी की शिकायतें दर्ज हुई हैं, लेकिन अब तक एक भी वाहन बरामद नहीं हो सका है।
हाल ही में छह सितंबर को अनूपपुर बस्ती निवासी दिनेश कुशवाहा की बाइक जिला चिकित्सालय परिसर से चोरी हो गई थी। इसके दो दिन बाद आठ सितंबर की सुबह ग्राम धोबे, राजेंद्रग्राम निवासी बृजलाल सिंह की बाइक भी पार्किंग से गायब हो गई।
वाहन चोरी के मामलों में जांच के दौरान जिला चिकित्सालय की सीसीटीवी व्यवस्था बड़ी बाधा बन रही है। अस्पताल में लगे कैमरों का रिकॉर्ड केवल तीन दिनों तक सुरक्षित रहता है और चौथे दिन पुराना डेटा स्वतः मिट जाता है। इसके अलावा कैमरों से मिलने वाले वीडियो की गुणवत्ता भी बेहतर नहीं बताई जा रही है।
वाहन चोरी होने के बाद पीड़ित पहले अपने स्तर पर बाइक की तलाश करता है। इसके बाद एफआईआर दर्ज कराने और पुलिस प्रक्रिया में दो से चार दिन लग जाते हैं। जब तक पुलिस जांच के लिए अस्पताल पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज खंगालती है, तब तक संबंधित रिकॉर्ड मिट चुका होता है। ऐसे में चोरों तक पहुंचने के लिए जरूरी डिजिटल साक्ष्य नहीं मिल पाते।
जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन करीब 700 से 800 मरीज और उनके स्वजन पहुंचते हैं। यहां रोज लगभग 250 से 300 बाइक और अन्य दोपहिया वाहन खड़े किए जाते हैं। पुरानी इमारत और पार्किंग परिसर में 16 से अधिक कैमरे लगे हैं, लेकिन उनकी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की क्षमता बेहद सीमित है।
पिछले एक वर्ष में अस्पताल परिसर और आसपास से 11 से अधिक बाइक चोरी होने की शिकायतें सामने आई हैं। अब तक किसी भी चोरी गई बाइक की बरामदगी नहीं हो सकी है, जिससे पुलिस को भी जांच में सफलता नहीं मिली है।
जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. एसआर परस्ते ने बताया कि सरकारी और सुरक्षा नियमों के अनुसार सीसीटीवी रिकॉर्ड का बैकअप 30 दिनों तक होना चाहिए। सार्वजनिक और संवेदनशील स्थानों पर कम से कम 15 से 30 दिन तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की आवश्यकता होती है।















