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मध्य प्रदेश
08 Sep, 2026

भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन का गूढ़ दर्शन, नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी: राज्यपाल

भोपाल में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित कार्यशाला में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शोध और समन्वय के माध्यम से प्राचीन ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा निजी विश्वविद्यालयों की भूमिका मजबूत करने पर जोर दिया।

भोपाल, 08 सितम्बर।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि व्यावहारिकता, गहन चिंतन और जीवन के गूढ़ दर्शन से समृद्ध एक शाश्वत ज्ञान धारा है। इस गौरवशाली परंपरा को वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों तक सार्थक रूप से पहुंचाने के लिए शोध, अनुसंधान और आपसी समन्वय को बढ़ावा देना आवश्यक है।

राज्यपाल मंगलवार को कुशाभाऊ सभागार में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और निजी विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त आयोजन में कार्यशाला का विषय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निजी विश्वविद्यालयों के योगदान’ रखा गया था। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार भी उपस्थित रहे।

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति पूजक रही है और सूर्य, चंद्रमा, ग्रह-नक्षत्र सहित प्रकृति के पांचों तत्व हमारी जीवन संस्कृति से जुड़े हैं। वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी और आकाश दैनिक जीवन का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इस महान ज्ञान परंपरा को और समृद्ध बनाने के लिए आयोजकों को साझा चिंतन के साथ अनुसंधान की दिशा में निरंतर प्रयास करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि वैदिक, पौराणिक और प्राचीन संस्कृति भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण स्रोत है। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ ज्ञान, विज्ञान और संस्कारों के समृद्ध भंडार हैं। इनमें वर्णित पात्र प्रेम, त्याग, आदर, स्वाभिमान, सम्मान और नैतिकता के आदर्श प्रस्तुत करते हैं।

राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों से नई पीढ़ी तक भारतीय परंपरा और उसके ज्ञान तत्वों को पहुंचाने की जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गरीब, पिछड़े, वंचित और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाया जाए तथा उन्हें विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए सक्षम और सामर्थ्यवान तैयार किया जाए। ऐसे आयोजनों की नियमित समीक्षा कर भविष्य की चुनौतियों और उनके समाधान पर भी विचार होना चाहिए।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा में शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ याद कराना नहीं था, बल्कि चरित्र, अनुशासन, आत्मनिर्भरता और कर्तव्यबोध का निर्माण करना था। भारतीय ज्ञान परंपरा की विशेषता ज्ञान को मानव और समाज के हित से जोड़ने वाली सोच में निहित है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को अज्ञान, भय और बंधन से मुक्त कर लोक कल्याण के लिए प्रेरित करना है।

उन्होंने कहा कि भारत एक प्राचीन देश होने के साथ महान ज्ञान सभ्यता भी है, जिसका मूल लक्ष्य सत्य की खोज और जीवन तथा समाज का कल्याण रहा है। उपनिषदों में जिज्ञासा, वेदों में प्रकृति और ब्रह्मांड के प्रति सम्मान तथा भारतीय दर्शन में जीवन के गहरे प्रश्नों पर चिंतन की समृद्ध विरासत दिखाई देती है।

राज्यपाल ने चरक और सुश्रुत के चिकित्सा तथा स्वास्थ्य संबंधी योगदान और कौटिल्य के अर्थशास्त्र में शासन, अर्थनीति, कूटनीति एवं समाज व्यवस्था पर किए गए चिंतन का उल्लेख करते हुए इसकी प्रासंगिकता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं, बल्कि समाज जीवन में मौजूद व्यावहारिक ज्ञान की समृद्ध धरोहर है। यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और पूर्वजों की वैज्ञानिक तथा समग्र जीवन दृष्टि को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा के व्यापक समावेश का महत्वपूर्ण अवसर दिया है। भारतीय दृष्टि और भारतीयता से शिक्षा को जोड़ने के लिए सार्वजनिक तथा निजी विश्वविद्यालयों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। इस दिशा में आधुनिक संदर्भों के अनुरूप वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शोध, अनुसंधान और दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए।

मंत्री परमार ने सभी निजी विश्वविद्यालयों से भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष प्रकोष्ठ गठित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के ज्ञान को संरक्षित कर तथ्यों पर आधारित जीवनोपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार की जानी चाहिए।

शिक्षा संस्कृति और उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश की कार्यप्रणाली की सराहना की और प्रदेश को राष्ट्रीय प्रयासों में अग्रणी बताया। मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पाठ्यक्रम निर्माण और प्रकाशन के प्रयासों की जानकारी दी।

उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के भविष्य के रोडमैप के लिए स्थानीयता और आधुनिकता का समन्वय जरूरी है। प्रशिक्षण, शोध और अनुसंधान पर आधारित प्रमाणित पाठ्यक्रम तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

कार्यशाला में निजी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन दिया और सचिव डॉ. अजीत सिंह पटेल ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सदस्य, निजी विश्वविद्यालय संघ के पदाधिकारी और शिक्षाविद उपस्थित रहे।

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व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। शुभांक-4-6-8

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