नई दिल्ली, 8 सितंबर।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रत्येक कॉलेज में छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल की सुविधा सुनिश्चित करने की मांग से जुड़ी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से साफ मना कर दिया है। इस संबंध में अधिवक्ता विमल त्यागी की ओर से मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की पीठ के समक्ष इस गंभीर मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की गुहार लगाई गई थी, जिस पर अदालत ने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया।
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह इस मामले में आज कोई भी अंतरिम आदेश पारित नहीं करेगी। बेंच ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे इसके लिए एक विधिवत जनहित याचिका दायर करें, जो नियमानुसार स्वतः ही सुनवाई के लिए सूची में आ जाएगी। अदालत ने तंज कसते हुए यह भी याद दिलाया कि हाल ही में सत्य निकेतन क्षेत्र में पीजी बिल्डिंग ढहने के भीषण हादसे पर बीते सात सितंबर को ही सुनवाई की जा चुकी है।
अदालत के निर्देशानुसार इस जनहित याचिका पर अब आगामी बुधवार को सुनवाई तय की गई है, क्योंकि बुधवार का दिन ऐसी याचिकाओं के लिए निर्धारित रहता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने वकील से सवाल किया कि क्या ऐसे मामलों में फौरी तौर पर कोई अंतरिम आदेश जारी किया जा सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले सात सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुई इमारत ढहने की दुर्घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए नगर निगम को एक उच्चस्तरीय जांच बैठाने के सख्त निर्देश दिए थे। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली सरकार को यह भी हिदायत दी थी कि मलबे में फंसे छात्रों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत कार्यों में तेजी लाई जाए और राज्य सरकार इस दर्दनाक हादसे की जिम्मेदारी से किसी भी स्थिति में बच नहीं सकती है।















