नई दिल्ली, 08 सितंबर।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को साझा किए गए सुभाषितम् के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि बुद्धिमान और समझदार व्यक्ति को ज्ञान की हर शाखा से उपयोगी सार ग्रहण करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत श्लोक साझा करते हुए उसका भावार्थ भी बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को बड़े या छोटे किसी भी ज्ञान स्रोत के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखना चाहिए और हर स्थान से मिलने वाले मूल्यवान ज्ञान को अपनाना चाहिए।
उन्होंने इसकी तुलना मधुमक्खी से की, जो अलग-अलग फूलों से रस एकत्र करती है। उसी प्रकार एक समझदार व्यक्ति को ज्ञान के विभिन्न स्रोतों से आवश्यक और उपयोगी बातें ग्रहण कर उन्हें अपने जीवन और समझ का हिस्सा बनाना चाहिए।
यह प्रसिद्ध श्लोक श्रीमद्भागवत महापुराण से लिया गया है। इसमें शिक्षार्थी को मधुमक्खी के समान बनने की प्रेरणा दी गई है, जो अनेक स्थानों से सार लेकर उसे एकत्र करती है।
सुभाषितम् का संदेश है कि सच्चा ज्ञान पाने के लिए व्यक्ति को सभी उपलब्ध स्रोतों से सीखने का प्रयास करना चाहिए। बुद्धिमान व्यक्ति आवश्यक ज्ञान को ग्रहण कर उसे अपनी समझ में समाहित करता है, ठीक उसी तरह जैसे मधुमक्खी अनेक फूलों से रस लेकर शहद तैयार करती है।















