भोपाल, 8 सितंबर।
भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में उसके प्रभावी समावेश को लेकर भोपाल में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। निजी विश्वविद्यालय संघ मध्य प्रदेश और मध्य प्रदेश शासन के अधीन विनियामक आयोग के संयुक्त तत्वावधान में कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम का विषय भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निजी विश्वविद्यालयों का योगदान रहा।
कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी, हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक अशोक कडैल और निजी विश्वविद्यालय संघ मध्य प्रदेश के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, निदेशक, विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ शिक्षाविद् शामिल हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संजीव अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा देश की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का आधार है। उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालय इस परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के साथ इसे आधुनिक शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य की शिक्षा को दिशा देने वाली जीवंत परंपरा भी है। उन्होंने नई पीढ़ी तक इस ज्ञान को पहुंचाने की जिम्मेदारी शिक्षण संस्थानों की बताई।
अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन ने भारतीय ज्ञान परंपरा को उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम, शोध और नवाचार से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों को भारतीय दृष्टिकोण के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सकता है।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन, शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और सामाजिक विकास का व्यापक दर्शन समाहित है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से इस समृद्ध विरासत को शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी रूप से स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास और राष्ट्र निर्माण की चेतना विकसित करना भी है। भारतीय ज्ञान परंपरा इस सोच की मजबूत आधारशिला प्रदान करती है।
कार्यक्रम में विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान विरासत को केवल पुस्तकों और परंपराओं तक सीमित न रखते हुए आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान, तकनीक, प्रबंधन और सामाजिक विकास से जोड़ने पर जोर दिया।
इस अवसर पर हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित भारतीय ज्ञान परंपरा पुस्तक अतिथियों को भेंट की गई। इसे भारतीय ज्ञान, दर्शन, संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।
कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से 200 से अधिक गणमान्य नागरिक शामिल हुए। इनमें कुलपति, निदेशक, वरिष्ठ शिक्षाविद्, विभागाध्यक्ष और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समापन अवसर पर निजी विश्वविद्यालय संघ के सचिव डॉ. अजीत सिंह पटेल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने के साथ आधुनिक शिक्षा, शोध और नवाचार का अभिन्न हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है।















