नई दिल्ली, 08 सितंबर।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में सशस्त्र बलों के लिए 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन प्रस्तावों के तहत थलसेना, नौसेना और वायुसेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करने के लिए विभिन्न रक्षा उपकरण और प्रणालियां खरीदी जाएंगी।
भारतीय थलसेना के लिए रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों की पहचान करने वाले टोही वाहन, उच्च गतिशीलता वाहन, स्वचालित यांत्रिक सुरंग बिछाने वाली प्रणालियां, उन्नत हल्के हेलीकाप्टर, ट्रॉल टैंक और सर्वत्र पुल प्रणाली की खरीद को स्वीकृति मिली है।
ये टोही वाहन दूषित क्षेत्रों की पहचान, निगरानी और चिह्नित करने में सक्षम होंगे। उच्च गतिशीलता वाहन कठिन इलाकों में सैन्य संचालन, रसद सहायता और आवाजाही की क्षमता बढ़ाएंगे।
उन्नत हल्के हेलीकाप्टर थलसेना और वायुसेना के लिए विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों तथा जटिल परिचालन परिस्थितियों में मिशन पूरे करने में उपयोगी होंगे। ट्रॉल टैंक और पुल प्रणाली का इस्तेमाल अलग-अलग इलाकों में सैन्य टुकड़ियों को आवागमन की सुविधा देने के लिए किया जाएगा।
भारतीय नौसेना के लिए अरुध्रा रडार और समुद्री गैस टर्बाइन के विकास तथा बाद में उनकी खरीद को आवश्यकता की स्वीकृति प्रदान की गई। अरुध्रा रडार नौसैनिक वायु स्टेशनों पर मौजूदा हवाई मार्ग निगरानी रडार की जगह लेंगे।
समुद्री गैस टर्बाइन युद्धपोतों की प्रणोदन प्रणाली के रूप में काम करेंगी और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगी। वायुसेना के लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकाप्टरों की युद्ध क्षमता बढ़ाने से जुड़े कई प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है।
बैठक में भूमि आधारित बहुउद्देशीय जैमर की खरीद और रक्षा बल सुरक्षित पहुंच कार्ड प्रणाली लागू करने को भी स्वीकृति मिली। जैमर दुश्मन के रडार के खिलाफ प्रभावी बाधा उत्पन्न करेगा।
नई कार्ड प्रणाली मौजूदा कागजी पहचान पत्रों, पास और परमिट की जगह रेडियो आवृत्ति पहचान आधारित परस्पर उपयोग योग्य स्मार्ट कार्ड प्रणाली उपलब्ध कराएगी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कुल खरीद का 98 प्रतिशत भारतीय उद्योग से किया जाएगा। इससे देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को घरेलू उद्योग के माध्यम से पूरा करने में मदद मिलेगी।















