तमिलनाडु, 08 सितंबर।
डीएमके सांसद पी. विल्सन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलापति के विधानसभा में दिए गए भाषण को लेकर तीखी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विधानसभा जैसे गंभीर और महत्वपूर्ण मंच को रील बनाने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
नई दिल्ली में मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए विल्सन ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह रवैया राजनीतिक अपरिपक्वता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से ऐसे वीडियो तैयार कर जनता की प्रशंसा और समर्थन हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इसका अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहा।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में पिछले 100 दिनों के दौरान राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। उनके अनुसार तमिलनाडु में लगातार हत्याओं की घटनाएं हो रही हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
विल्सन ने कहा कि सरकार को सामाजिक माध्यमों पर वीडियो बनाने के बजाय जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री पर पुराने मामलों और करीब 50 वर्ष पुरानी सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख कर विधानसभा को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने कहा कि यदि पुराने मामलों के आधार पर सदन में चर्चा की जा सकती है तो मुख्यमंत्री से जुड़े आयकर विभाग के पुराने मामलों पर भी चर्चा होनी चाहिए। वित्त मंत्रालय से अपने संसदीय प्रश्न के उत्तर में मिले आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अप्रैल 2021 से फरवरी 2026 के बीच प्रवर्तन निदेशालय ने 4,377 मामले दर्ज किए, लेकिन केवल 59 मामलों में दोषसिद्धि हुई।
विल्सन ने दावा किया कि 98 प्रतिशत से अधिक मामले अभी लंबित हैं, इसलिए केवल प्रवर्तन निदेशालय के पत्रों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री पर जनता का भरोसा तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के 100 से अधिक दिन बीतने के बाद भी वह लोगों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से विधानसभा की गरिमा बनाए रखने और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय शासन तथा जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।















