नई दिल्ली, 08 सितंबर।
दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्रावास के रूप में संचालित इमारत गिरने के हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर कार्रवाई तेज हो गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि ढही हुई इमारत के ठीक बगल वाला भवन खतरनाक घोषित किया गया है और उसे बुधवार को गिराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के परिवार पार्थिव शरीर लेकर दिल्ली से अपने घरों के लिए रवाना हो चुके हैं। सरकार ने आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं और पीड़ित परिवारों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।
मुख्यमंत्री ने घायलों से भी मुलाकात की। उनके अनुसार, मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें सात लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दो श्रमिक भी शामिल थे। एक घायल श्रमिक का इलाज चल रहा है और उसके पैर में गंभीर चोट है। सरकार ने पीड़ितों को बेहतर उपचार और आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है।
हादसे के बाद सत्य निकेतन क्षेत्र में भय का माहौल है और कई छात्र अपना सामान लेकर छात्रावासों से निकलते दिखाई दिए। नगर निगम ने घटनास्थल के आसपास मौजूद खतरनाक इमारतों को गिराने के लिए नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है।
नगर निगम के एक अधिकारी के अनुसार, ढही हुई इमारत के पास स्थित भवन संख्या 13 बेहद जर्जर स्थिति में था और उसे पहले ही खाली करा लिया गया था। इसके अलावा तीन अन्य इमारतों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि हादसे से पहले इमारत के तहखाने में निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा था। मामले में इमारत के मालिक और उसके परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस की प्राथमिकी में यह भी उल्लेख किया गया है कि करीब 50 वर्ष पुरानी इमारत में चार मंजिलों का अवैध निर्माण किया गया था। मामले से जुड़े तहखाने की मरम्मत कराने वाले ठेकेदार की भी पुलिस तलाश कर रही है।
दिल्ली उच्च न्यायालय में हादसे से जुड़े मामले में जवाबदेही तय करने की मांग उठी है। नगर निगम ने दक्षिणी क्षेत्र के पांच अधिकारियों को भी निलंबित किया है।















