मुंबई, 08 सितंबर।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत के फिनटेक क्षेत्र की अगली बड़ी सफलता केवल डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अब ऋण, बीमा, बचत, निवेश और पेंशन जैसी वित्तीय सेवाओं को समाज के उन वर्गों तक पहुंचाना जरूरी है, जो लंबे समय तक पारंपरिक वित्तीय व्यवस्था से बाहर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को मुंबई में वैश्विक फिनटेक महोत्सव 2026 का उद्घाटन करते हुए यह बात कही।
प्रधानमंत्री ने भारत की फिनटेक यात्रा को उल्लेखनीय बताते हुए कहा कि एकीकृत भुगतान प्रणाली इसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। उन्होंने बताया कि 25 अगस्त को यूपीआई ने अपने दस वर्ष पूरे किए और अगस्त में इसके माध्यम से 2,400 करोड़ से अधिक लेनदेन हुए। कभी बैंकिंग को लोगों की उंगलियों तक पहुंचाने की बात असंभव लगती थी, लेकिन आज करोड़ों लोग डिजिटल वित्तीय व्यवस्था से जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि यूपीआई अब भारत की सीमाओं से बाहर निकलकर 11 देशों तक पहुंच चुका है। अगले चरण में विभिन्न देशों की भुगतान प्रणालियों के साथ इसे जोड़ने की दिशा में काम होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने सिंगापुर के साथ भुगतान संपर्क का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए धन भेजने की लागत कम कर सकती है।
मोदी ने कहा कि फिनटेक बाजार का बड़ा हिस्सा अभी भुगतान सेवाओं पर केंद्रित है, लेकिन अब छोटे कारोबारियों, श्रमिकों और नियमित आय अर्जित करने वाले लोगों तक बचत, पेंशन, बीमा और ऋण की आसान पहुंच बनानी होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि फिनटेक ने लाखों रेहड़ी-पटरी वालों को औपचारिक ऋण व्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि अध्ययन के अनुसार योजना के लाभार्थियों की औसत वार्षिक आय में 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है और उनके आवास, पोषण, स्वास्थ्य तथा बच्चों की शिक्षा में भी सुधार आया है। सरकार ने इस योजना को वर्ष 2030 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।
प्रधानमंत्री ने छोटे कारोबारों के डिजिटल लेनदेन के आधार पर उनकी वित्तीय जरूरत समझकर उपयुक्त ऋण उपलब्ध कराने की संभावना पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी छोटे उद्यमों के लिए उनकी जरूरतों के अनुरूप वित्तीय उत्पाद तैयार करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है और फिनटेक का अगला अध्याय इसी दिशा में आगे बढ़ेगा।
फिनटेक कंपनियों के सामने चार प्रमुख प्राथमिकताएं रखते हुए मोदी ने साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च स्तर का बनाने और नैतिक आंकड़ा संरक्षण के मानक तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने मजबूत नियामक और नवाचार आधारित व्यवस्था विकसित करने के साथ उपभोक्ता संरक्षण सूचकांक बनाने का सुझाव दिया, जिससे कंपनियों की पारदर्शी रेटिंग की जा सके।
उन्होंने कहा कि एजेंटिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता, टोकनाइजेशन और क्वांटम तकनीक वित्तीय क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं लेकर आ रही हैं। चुनौती इन अवसरों को वास्तविक परिणामों में बदलने की है, जिसके लिए फिनटेक कंपनियों को मिलकर ठोस लक्ष्य निर्धारित करने होंगे।
वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया संघर्ष और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है तथा ऊर्जा, जिंसों की आपूर्ति और व्यापार पर दबाव बना हुआ है। ऐसे समय में अप्रैल-जून तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत वृद्धि दर दुनिया में भरोसा पैदा करती है।
मोदी ने कहा कि भारत की फिनटेक सफलता अब तक व्यापक पहुंच, सुरक्षित व्यवस्था, प्रौद्योगिकी, लोकतंत्रीकरण और जनता के विश्वास पर आधारित रही है। इन्हीं मूल्यों के साथ अब अगली पीढ़ी के नवाचारों पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि सुधारों की गति आगे भी तेज रहेगी और डिजिटल भारत की सफलता अब एक नए चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार है।















