इंदौर, 08 सितम्बर।
शहर और आसपास के इलाकों में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को देखते हुए मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने महत्वपूर्ण 132 केवी पारेषण नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है। इस परियोजना के तहत मौजूदा लाइनों में लगे एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों को आधुनिक हाई टेम्परेचर लो सैग कंडक्टरों से बदला जा रहा है।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मंगलवार को बताया कि नई तकनीक वाले इन कंडक्टरों की विद्युत धारा वहन करने की क्षमता मौजूदा पैंथर कंडक्टरों से काफी अधिक है। इससे एक ही मौजूदा पारेषण कॉरिडोर के माध्यम से करीब तीन गुना अधिक विद्युत शक्ति का स्थानांतरण संभव हो सकेगा। खास बात यह है कि क्षमता बढ़ाने के लिए नया पारेषण कॉरिडोर तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
खंडवा रोड स्थित 220 केवी इंदौर साउथ जोन सबस्टेशन से 132 केवी चंबल सबस्टेशन तक जाने वाली दोनों 132 केवी लाइनों में यह काम शुरू किया गया है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स और सत्य साईं सर्किट शामिल हैं। इसी तरह सांवेर रोड स्थित 220 केवी इंदौर नॉर्थ जोन सबस्टेशन से 132 केवी चंबल सबस्टेशन और पोलोग्राउंड से जुड़े दोनों सर्किटों में भी पुराने पैंथर कंडक्टर बदले जा रहे हैं।
केवल कंडक्टर बदलने तक यह परियोजना सीमित नहीं रहेगी। इससे जुड़े 14 फीडर बे का भी उन्नयन किया जा रहा है। इनमें चंबल, इंदौर साउथ जोन, इंदौर नॉर्थ जोन, इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स और सत्य साईं सबस्टेशनों के संबंधित फीडर बे शामिल हैं।
बढ़ी हुई विद्युत धारा वहन क्षमता के अनुरूप स्विचयार्ड और फीडर बे में लगे उपकरणों को भी उन्नत किया जाएगा। इससे पूरे नेटवर्क में बढ़ी हुई क्षमता का बेहतर तरीके से उपयोग किया जा सकेगा और पारेषण व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
नई तकनीक के कंडक्टर पारंपरिक एसीएसआर कंडक्टरों की तुलना में अधिक तापमान पर काम करने में सक्षम हैं। ऊंचे तापमान के दौरान भी इनमें झुकाव अपेक्षाकृत कम रहता है, जिससे मौजूदा लाइनों की क्षमता बढ़ाने में यह तकनीक उपयोगी साबित होती है।
इनकी अधिक तापीय विद्युत धारा वहन क्षमता से वर्तमान पारेषण नेटवर्क के जरिए ज्यादा बिजली भेजी जा सकेगी। इससे नई लाइन के लिए अलग से कॉरिडोर विकसित करने की आवश्यकता कम होगी और पहले से उपलब्ध नेटवर्क का अधिकतम उपयोग संभव हो सकेगा।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इंदौर के तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार और निर्माण गतिविधियों के कारण नए पारेषण कॉरिडोर के लिए मार्ग उपलब्ध कराना लगातार कठिन होता जा रहा है। ऐसे में मौजूदा कॉरिडोर में ही अधिक क्षमता वाले कंडक्टर लगाना महत्वपूर्ण तकनीकी समाधान है।
इस क्षमता वृद्धि से 132 केवी नेटवर्क पर विद्युत प्रवाह और महत्वपूर्ण लाइनों की लोडिंग का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। साथ ही संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। परियोजना से इंदौर और आसपास के क्षेत्रों की बढ़ती बिजली जरूरतों के अनुसार पारेषण व्यवस्था मजबूत होगी तथा मौजूदा कॉरिडोर, स्विचयार्ड और फीडर बे ढांचे का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।















