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संपादकीय
08 Sep, 2026

जानापाव से महाकाल तक आस्था का नया कॉरिडोर

जानापाव में 17 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के जरिए श्रीकृष्ण-परशुराम लोक विकसित करने की योजना से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

जानापाव, 08 सितंबर।

जब विकास की बात होती है तो अक्सर सड़क, बिजली और उद्योग की चर्चा होती है, लेकिन मध्यप्रदेश में अब विकास की परिभाषा बदल रही है। यहां आस्था को भी विकास के केंद्र में रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा जानापाव में 17 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन इसी नई सोच का प्रतीक है। श्रीकृष्ण-परशुराम लोक महाकाल लोक की तर्ज पर आकार लेगा और यह केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि सनातन परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास है।

जानापाव कोई साधारण पहाड़ी नहीं है। यह वह भूमि है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने शिक्षा प्राप्त की और सुदर्शन चक्र हासिल किया। यही वह स्थान है, जिसे भगवान परशुराम की जन्मस्थली कहा जाता है और जहां से साढ़े सात नदियों का उद्गम होता है। ऐसे में इसका विकास केवल पर्यटन विकास नहीं, बल्कि ऐतिहासिक ऋण चुकाने जैसा है। पांच हजार वर्ष पुराना संबंध जब आज के विकास से जुड़ता है तो उसकी गूंज दूर तक जाती है।

इस परियोजना में करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से कई कार्य प्रस्तावित हैं। इसमें भव्य ऑडिटोरियम, ध्यान कुटीर, हर्बल गार्डन, लैंडस्केपिंग, बहुउद्देशीय भवन और जनसुविधाओं का विकास शामिल है। सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव रोपवे का है। जानापाव की पहाड़ी तक पहुंचना बुजुर्गों और बच्चों के लिए कठिन है। रोपवे बनने से यह बाधा दूर होगी और श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ेगी।

मध्यप्रदेश का भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम से गहरा नाता है। प्रदेश में जहां-जहां उनके चरण पड़े, उन स्थलों को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। चित्रकूट, श्रीराम के वनगमन से जुड़े आश्रम, रुक्मिणी हरण और धार जिले में हुए युद्ध से जुड़े स्थानों का इतिहास भी सामने लाने की तैयारी है। सरकार टुकड़ों में नहीं, बल्कि समग्र सर्किट के रूप में धार्मिक पर्यटन को देख रही है।

महाकाल लोक के बाद उज्जैन में जो परिवर्तन आया, वह किसी से छिपा नहीं है। वहां लाखों श्रद्धालु हर महीने आ रहे हैं। स्थानीय व्यापार, रोजगार और होटल उद्योग को नई गति मिली है। इसी मॉडल को अब जानापाव में दोहराने की योजना है। अगर यह सफल होता है तो मालवा-निमाड़ अंचल में धार्मिक पर्यटन का एक पूरा कॉरिडोर बन जाएगा, जो इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर और जानापाव को एक साथ जोड़ेगा।

जानापाव के आसपास आदिवासी और ग्रामीण आबादी रहती है। अब तक यहां केवल एक छोटा मंदिर और कुंड ही आकर्षण थे, लेकिन नई परियोजना के बाद यहां दुकानें बढ़ेंगी, गाइड का काम मिलेगा और परिवहन व भोजन की व्यवस्था से रोजगार पैदा होगा। आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ आर्थिक चेतना भी जागेगी। यही विकास का सच्चा अर्थ है, जहां आस्था भी बचे और आजीविका भी बढ़े।

इस परियोजना का राजनीतिक संदेश भी साफ है। सरकार यह बताना चाहती है कि विकास केवल भौतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक भी होता है। विपक्ष इसे धर्म के नाम पर खर्च बता सकता है, लेकिन सच्चाई यह है कि धार्मिक पर्यटन स्थायी रोजगार देता है। यह रोजगार किसी फैक्ट्री की तरह बंद नहीं होता, बल्कि पीढ़ियों तक चलता है।

चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी चुनौती समय पर काम पूरा करना है। अक्सर शिलान्यास तो हो जाते हैं, लेकिन निर्माण वर्षों तक लटकता है। दूसरी चुनौती पर्यावरण की है। जानापाव एक नाजुक पहाड़ी है, जहां सात नदियों का उद्गम है। वहां निर्माण में संतुलन रखना होगा। तीसरी चुनौती स्थानीय लोगों को साथ लेकर चलने की है। अगर स्थानीय लोगों को लगा कि यह केवल बाहरी लोगों के लिए बन रहा है तो विरोध भी हो सकता है।

जानापाव को इंदौर-उज्जैन से सड़क मार्ग से बेहतर जोड़ा जाए, बस सुविधा बढ़ाई जाए और यहां लाइट एंड साउंड शो व डिजिटल म्यूजियम भी बनाया जाए, ताकि नई पीढ़ी को इतिहास रोचक लगे। अगर यह सब समय पर हुआ तो जानापाव राष्ट्रीय मानचित्र पर चमकेगा।

कुल मिलाकर 17 करोड़ रुपये का यह भूमिपूजन केवल एक औपचारिकता नहीं है। यह आस्था और विकास के संगम की नई कहानी है। श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करना और परशुराम लोक बनाना इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। महाकाल लोक ने उज्जैन को दुनिया में पहचान दी, अब परशुराम लोक जानापाव को नई पहचान देगा। यह परियोजना अगर अपने लक्ष्य पर पहुंची तो मालवा की धरती पर सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नया अध्याय लिखा जाएगा।

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आज का राशिफल

व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। शुभांक-4-6-8

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